Bipin Rawat's Profile: CDS रावत के खून में थी देशभक्ति, कहलाते थे 'काउंटर विशेषज्ञ'
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CDS रावत के खून में है देशभक्ति
आपको बता दें कि बिपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस थे। मालूम हो कि सीडीएस एक फोर स्टार जनरल होता है जो कि रक्षा मंत्रालय में मिलिट्री मामलों से जुड़े एक विभाग का मुखिया होगा। अपनी बहादुरी और तेज दिमाग के लिए लोकप्रिय बिपिन रावत ने देशभक्ति का पाठ बचपन से ही सीखा था। उनके पिता भी आर्मी ऑफिसर थे और बतौर लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर हुए थे। रावत ने अपनी पूरी पढ़ाई देहरादून के कैमबेरियन हॉल स्कूल से की थी।

स्वोर्ड ऑफ ऑनर
इसके बाद उन्होंने उसके बाद पुणे के खड़कवासला में एनडीए और फिर साल 1978 में वह इंडियन मिलिट्री एकेडमी, से पास आउट हुए और यहां पर उन्हें स्वोर्ड ऑफ ऑनर जैसा सम्मान भी हासिल हुआ था।
जहां पिता वहां बेटा
इसे आप संयोग कहें या फिर कुछ और कि साल 1978 में रावत की उसी गोरखा राइफल्स में बतौर लेफ्टिनेंट कमीशंड हुए जो कभी उनके पापा की यूनिट थी।
कहलाते थे काउंटर विशेषज्ञ
काउंटर ऑपरेशन विशेषज्ञ के रूप में पहचान बनाने वाले रावत हमेशा कहते थे कि भारत हमेशा ईंट का जवाब पत्थर से देता है और आगे भी देता ही रहेगा।

इन पदों के लिए किया है काम
- बतौर लेफ्टिनेंट ( करियर प्रारंभ)
- मिलिट्री ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट में वे जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड टू
- मिलिट्री ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट में वे जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड टू
- कर्नल मिलिट्री सेक्रेटरी,
- डिप्टी मिलिट्री सेक्रेटरी,
- जूनियर कमांड विंग में सीनियर इंस्ट्रक्टर
- आर्मी कमांड चीफ

इन महत्वपूर्ण ऑप्रेशन को दिया अंजाम
- जून 2015 में हुई म्यांमार में सर्जिकल स्ट्राइक
- उरी हमले के बाद हुई पीओके सर्जिकल स्ट्राइक में अहम रोल
तीसरे गोरखा आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत
गोरखा रेजीमेंट से आने वाले लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत तीसरे सेना प्रमुख थे। वो बहुत अच्छे विचारक और लेखक भी थे उनके बहुत सारे आर्टिकल अक्सर दैनिक अखबारों में प्रकाशित होते थे।












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