विवादों से बेस्ट सेलर हुई नटवर सिंह की आत्मकथा

इंडिया बुक डिस्ट्रिब्यूटर्स के वाइस प्रेसिडेंट बलदेव वर्मा ने बताया कि यह अब मार्केटिंग स्ट्रेटजी हो गई है कि किसी किताब को बाजार में लाने से पहले उसके अंशों को विवादित कर दिया जाए। ‘वन लाइफ इज नॉट एनफ' के साथ भी यही किया गया। उन अंशों को मीडिया ने हाथों-हाथ लिया जिनमें नटवर सिंह ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी या कांग्रेस पर कठोर टिप्पणियां की थीं। इसके चलते पाठकों में इसे खरीदने की होड़ मच गई। बलदेव वर्मा दावा करते हैं कि यह आत्मकथा 30 हजार से ज्यादा मजे से बिक जाएगी।
राजधानी की मशहूर किताबों की दूकान सेंट्रल न्यूज एजेंजी के एक सेल्समैन ने बताया कि वे ‘वन लाइफ इज नॉट एनफ' की 100 से ज्यादा प्रतियां बेच चुके हैं। इसके बावजूद इसकी मांग बनी हुई है। इसकी कीमत 500 रुपये है।
खोल कर रख दिये नेहरू-गांधी परिवार के सच
सनद रहे कि नटवर सिंह ने इस किताब में नेहरू-गांधी परिवार के साथ अपनी निकटता के बारे में खुल कर लिखा है। किताब में एक युवा नेता के तौर पर राजीव गांधी का उत्थान और फिर उनका फीका पड़ता करिश्मा दोनों को भी नजदीक से देखा और लिखा गया है। उन्होंने यह भी लिखा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद राजीव गांधी को मुख्यत: उनके दोस्त ही गाइड करते थे, जो बहुत ऊर्जावान और ब्राइट थे लेकिन अनुभवहीनता दिखती थी। उनके सलाहकार न तो कांग्रेस का इतिहास जानते थे और न ही स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में।
इस बीच, राजधानी के रीडिंग हैबिट प्रकाशन के प्रमुख रवि कुमार ने भी कहा कि इसमें कोई बुराई नहीं है कि अगर कोई लेखक और प्रकाशक अपनी किताब को बेचने के लिए पहले कोई विवाद खड़े करता है। वे मानते हैं कि जिस किताब के बाजार में आने से पहले कोई विवाद नहीं होता वह किताब पिट जाती है। उन्होंने बताया कि हाल ही में संजय बरू की किताब एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर भी विवादों के कारण बेस्ट सेलर बनी।












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