अभिषेक बनर्जी के घर अचानक पहुंची पुलिस! नोटिस के बाद बढ़ा सस्पेंस, क्या TMC के अंदर शुरू हो गई ‘इनर वॉर’?
Abhishek Banerjee Kolkata Police Notice: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया सियासी तूफान उठता दिख रहा है। अभिषेक बनर्जी के आधिकारिक आवास 'शांतिनिकेतन' पर सोमवार शाम अचानक भारी पुलिस फोर्स पहुंचने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ दिन पहले ही कोलकाता नगर निगम ने अभिषेक बनर्जी से जुड़ी 17 संपत्तियों को कथित अवैध निर्माण के आरोप में नोटिस भेजा था।
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि पुलिस करीब एक घंटे तक घर के बाहर मौजूद रही, लेकिन न तो पुलिस अधिकारियों ने कोई बयान दिया और न ही तृणमूल कांग्रेस की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई। इससे पूरे मामले को लेकर सस्पेंस और गहरा गया।

नोटिस के बाद अचानक पुलिस की एंट्री
कोलकाता नगर निगम यानी केएमसी ने हाल ही में अभिषेक बनर्जी से जुड़ी कई संपत्तियों को नोटिस जारी किया था। इन संपत्तियों में उनका सरकारी आवास, उनके माता-पिता से जुड़े ठिकाने और उनकी कंपनी 'लीप्स एंड बाउंस' से संबंधित प्रॉपर्टी भी शामिल बताई जा रही हैं।
नगर निगम ने इन सभी मामलों में जवाब देने के लिए सात दिन की समयसीमा तय की थी। सोमवार को यह समयसीमा खत्म हो गई और उसी दिन पुलिस की मौजूदगी ने पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि पुलिस वहां किस मकसद से पहुंची थी। लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा यही है कि नोटिस का जवाब तय समय में नहीं मिलने के बाद यह गतिविधि बढ़ी।
घर से हटाया गया निगरानी सिस्टम
सूत्रों के मुताबिक पुलिस जब वहां से लौटी तो अपने साथ एक मॉनिटर भी ले गई, जो इलाके के सुरक्षा कैमरों की निगरानी के लिए लगाया गया था। बताया जा रहा है कि अभिषेक बनर्जी की Z+ सुरक्षा हटाए जाने के बाद यह निगरानी सिस्टम भी हटाया जा रहा है। हालांकि इस पर भी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यही वजह है कि सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें शुरू हो गई हैं।
मेयर फिरहाद हकीम के बयान से बढ़ा विवाद
पूरा मामला तब और दिलचस्प हो गया जब कोलकाता के मेयर Firhad Hakim ने मीडिया से कहा कि उन्हें इन नोटिसों की जानकारी ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि केएमसी एक्ट के तहत मेयर सिर्फ नीति बनाने का काम करते हैं और प्रशासनिक फैसलों की हर जानकारी उनके पास नहीं होती।
लेकिन उनके इस बयान ने विवाद शांत करने के बजाय और बड़ा कर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि अगर इतने बड़े स्तर पर नोटिस जारी हुए, तो क्या सच में मेयर को इसकी जानकारी नहीं थी?
क्या TMC में अंदरूनी खींचतान शुरू?
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस पूरे घटनाक्रम से नाराज बताई जा रही हैं। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने मेयर और मेयर परिषद के सदस्यों के साथ बैठक में इस मुद्दे पर जवाब भी मांगा।
लेकिन फिरहाद हकीम ने वही जवाब दोहराया कि उन्हें इस कार्रवाई की जानकारी नहीं थी। यहीं से पार्टी के अंदर संभावित खींचतान की चर्चा तेज हो गई है। बंगाल की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला सिर्फ अवैध निर्माण नोटिस तक सीमित नहीं है, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर पुराने और नए नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी का संकेत भी हो सकता है।
सिर्फ कानूनी मामला या बड़ा राजनीतिक संदेश?
अभिषेक बनर्जी को लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का भविष्य माना जाता है। ऐसे में उनके घर पर पुलिस की मौजूदगी और फिर पार्टी के भीतर अलग-अलग बयान सामने आना कई सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल न पुलिस ने आधिकारिक कारण बताया है और न ही अभिषेक बनर्जी की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई है। लेकिन इतना साफ है कि इस पूरे घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।














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