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'...तो कांग्रेस के साथ वाले गठबंधन में रहना मुश्किल': विपक्षी दलों की बैठक के बाद बोली AAP

Opposition meeting in Patna: पटना में विपक्षी दलों की बैठक के बाद आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में सर्विस के मुद्दे पर केंद्र सरकार ऑर्डिनेंस को लेकर कांग्रेस के खिलाफ जोरदार हमला बोल दिया है। पार्टी ने यहां तक कह दिया है कि ऐसे में कांग्रेस के साथ वाले गठबंधन में उसका रहना मुश्किल होगा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पटना में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से बुलाई गई बैठक में शामिल होने के बाद, उनकी पार्टी की ओर से ऑर्डिनेंस के मसले पर एक बयान जारी किया गया है, जिसमें सीधे तौर पर कांग्रेस की 'चुप्पी' पर सवाल उठाया गया है।

aap on congress

11 विपक्षी दलों ने राज्यसभा में विरोध की घोषणा की है-AAP
आम आदमी पार्टी ने अपने बयान में दावा किया है कि 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को छोड़कर बाकी सभी 11 पार्टियां जिनका राज्यसभा में प्रतिनिधित्व है, उन्होंने स्पष्ट तौर पर काले अध्यादेश (दिल्ली सरकार को लेकर केंद्र का अध्यादेश) के खिलाफ अपना स्टैंड जाहिर किया है और घोषणा की है कि वे राज्यसभा में उसका विरोध करेंगे।'

कांग्रेस की चुप्पी संदेह पैदा करती है-आम आदमी पार्टी
आम आदमी पार्टी ने कहा है, 'कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है, जो लगभग सभी मसलों पर एक स्टैंड लेती है, उसने अभी तक काले अध्यादेश को लेकर अपनी स्थिति सार्वजनिक नहीं की है। कांग्रेस की चुप्पी उसके असली इरादे के प्रति संदेह पैदा करती है।' यही नहीं कांग्रेस की दिल्ली और पंजाब 'यूनिट ने घोषणा की है कि पार्टी को मोदी सरकार का इस मसले पर समर्थन करना चाहिए।'

'कांग्रेस ने ऐसा करने से मना कर दिया'
विपक्षी दलों की बैठक में पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ पंजाब के सीएम भगवंत मान भी पहुंचे थे। लेकिन, इसके बाद हुई संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में ये दोनों नेता उपस्थित नहीं थे। आम आदमी पार्टी ने कहा है कि पटना में मीटिंग के दौरान कई दलों ने कांग्रेस से कहा कि सार्वजनिक तौर पर अध्यादेश का विरोध करें, लेकिन 'कांग्रेस ने ऐसा करने से मना कर दिया।'

'इस काले कानून को हराना महत्वपूर्ण है'
पार्टी के मुताबिक 'काला अध्यादेश न सिर्फ दिल्ली की चुनी हुई सरकार से लोकतांत्रिक अधिकार छीनने के लिए है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक सिद्धांतों के लिए बड़ा खतरा है। अगर इसे चुनौती नहीं दी गई तो यह खतरनाक ट्रेंड दूसरे राज्यों तक फैलेगा, जिससे लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई राज्य सरकारों की शक्तियां खत्म कर दी जाएंगी। इस काले कानून को हराना महत्वपूर्ण है।'

'...तो कांग्रेस के साथ वाले गठबंधन में रहना मुश्किल'
आम आदमी पार्टी ने कहा, एक 'टीम प्लेयर' की तरह काम करने से (कांग्रेस का) इनकार करना, खासकर ऑर्डिनेंस के मसले पर तो 'आम आदमी पार्टी के लिए वैसे किसी गठबंधन का हिस्सा बनना बहुत मुश्किल होगा, जिसमें कांग्रेस होगी।'

कांग्रेस दिल्ली के साथ या मोदी सरकार के साथ-AAP
केजरीवाल की पार्टी ने कहा है, 'निजी बातचीत के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इशारा किया है कि पार्टी राज्यसभा में वोटिंग के दौरान अनौपचारिक रूप से या औपचारिक रूप से अनुपस्थित रह सकती है। इस मुद्दे पर कांग्रेस की अनुपस्थिति बीजेपी को मदद करेगी जो फिर और भी ज्यादा भारतीय लोकतंत्र पर हमला करेगी। अब समय आ चुका है कि कांग्रेस फैसला करे कि वह दिल्ली की जनता के साथ है या मोदी सरकार के साथ।'

संसद सत्र से पहले लेंगे फैसला- खड़गे
उधर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी दलों की बैठक शुरू होने से पहले कहा था कि दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं पर केंद्र के नियंत्रण को लेकर जारी अध्यादेश का संसद में विरोध को लेकर संसद सत्र शुरू होने से पहले फैसला लिया जाएगा।

इसके बारे में इतनी पब्लिसिटी क्यों है-कांग्रेस
उन्होंने कहा, 'इसका विरोध करना या इसपर प्रस्ताव रखना बाहर नहीं होता, यह संसद में होता है। संसद शुरू होने से पहले सभी पार्टियां तय करती हैं कि उन्हें किन मुद्दों पर साथ मिलकर काम करना है। वो (आम आदमी पार्टी) यह जानते हैं और यहां तक कि उनके नेता भी हमारे सर्वदलीय बैठकों में आते हैं। मैं नहीं जानता कि इसके बारे में बाहर इतनी पब्लिसिटी क्यों है।'

राहुल गांधी और बीजेपी में समझौता हो गया है- आम आदमी पार्टी
खड़गे के इस बयान पर आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका कक्कर ने पहले दावा किया था कि 'हमें भरोसेमंद सूत्रों से खबर मिली कि राहुल गांधी और बीजेपी के बीच में समझौता हो चुका है। नहीं तो इतना मुश्किल क्या है ये क्लियर करना...यह एक असंवैधानिक अध्यादेश है, उन्हें यह करने में इतना समय क्यों लग रहा है?...'

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