प्रियंका गांधी बनीं अध्यक्ष तो पूरी तरह बर्बाद हो जायेगी कांग्रेस
ऐसा इसलिये क्योंकि कांग्रेस के ऊपर सबसे बड़ा धब्बा परिवारवाद की राजनीति का है और यही परिवारवाद इसे ले डूबा। देश की बागड़ोर संभालने जा रहे नरेंद्र मोदी ने अपनी हर एक चुनावी सभा में जोर दे-दे कर कहा कि देश को परिवारवाद ले डूबा है। मोदी के शब्द जनता के जहन में ऐसे बैठ गये कि भाजपा ने ही अकेले 282 सीटें जीत लीं। वहीं कांग्रेस मात्र 44 पर सिमट कर रह गई।
नये कलेवर में हों पार्टी के चुनाव
डूबती हुई कांग्रेस के लिये अब मात्र एक चारा बचा है। वो है परिवारवाद से ऊपर उठकर काम करना। राहुल गांधी हमेशा कहते हैं कि उनकी पार्टी में लोकतांत्रिक ढंग से काम होता है। तो इसी लोकतांत्रिक व्यवस्था को एक बार फिर नये कलेवर में सामने लायें और अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पदों के लिये पार्टी के किसी अन्य सदस्य को खड़ा करें। चुनाव हों और तब जो नया अध्यक्ष बनेगा वह पार्टी को नई दिशा की ओर ले जाने में जरूर सक्षम होगा।
अध्यक्ष बनायें, रोबोट नहीं
सोनिया गांधी को पिछले 10 साल से रोबोट का रिमोट कंट्रोल हाथ में रखने की आदत सी पड़ चुकी है, उस आदत को अब छोड़ना होगा।
प्रियंका के अंदर इंदिरा गांधी का अक्स मत खोजे कांग्रेस
केंद्र सरकार में 10 साल तक मनमोहन सिंह उनके हाथ की कठपुतली बने रहे और पार्टी के अंदर राहुल गांधी ने भी लगभग वैसा ही रोल अदा किया। अब अगर नया अध्यक्ष गांधी परिवार के बाहर से चुना जाये, तो उसे स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका दिया जाये, न कि रोबोट की तरह।
कांग्रेस शासित राज्यों का विकास
कांग्रेस पार्टी के लिये इस वक्त कांग्रेस शासित राज्यों का विकास बेहद जरूरी है, अगर वहां कोई लापरवाही बरती या घोटाले किये, तो जनता इस पार्टी को बक्शेगी नहीं।
खैर कांग्रेस कार्यालय में तमाम नेता पहुंच चुके हैं, अब देखना यह है कि पार्टी अपने नये नेता को किस तरह चुनती है।













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