पश्चिम बंगाल में अनुच्छेद 355 लागू करने की मांग, अधीर रंजन ने कहा- राष्ट्रपति से करूंगा मुलाकात

नई दिल्ली, 22 मार्च। पश्चिम बंगाल में टीएमसी (TMC) नेता की हत्या के बाद भड़की हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई। मामले में गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की है। घटना की जांच के लिए एसआईटी गठित की जा चुकी है। वहीं कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि इस एसआईटी का कोई फायदा नहीं है। पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती जा रही है। बीरभूम हिंसा मामले (Birbhum Case) को लेकर उन्होंने राष्ट्रपति से मुलाकात करने की बात कही है। अधीर रंजन ने कहा कि बंगाल में लोग अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

Birbhum violence case

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में टीमएसी (TMC) नेता व उप प्रधान की मौत के बाद हिंसक हुए लोगों ने 5 घरों के दरवाजे को बंद कर आग लगा दी थी। घटना गत सोमवार यानी 21 मार्च की है। जब बीरभूम के शाम बागतुई गांव में हुए बम हमले में पंचायत के उप प्रधान भादू शेख की मौत हो गई थी। उप प्रधान की मौत से गुस्साए लोगों ने गांव के कई घरों में आग लगा दी। संजू शेख के एक घर से सात जले हुए शव बरामद किए गए और एक व्यक्ति की अस्पताल में मौत हो गई। गंभीर रूप से झुलसे दो अन्य लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। मामले में 11 लोग गिरफ्तार हुए हैं। इस घटना के बाद एक बार फिर से पश्चिम बंगाल में हिंसा की व्यापकता और गिरती कानून व्यवस्था सामने आई है।

राज्य के डीजीपी मनोज मालवीय के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिला है कि हिंसा दो पक्षों में पुरानी रंजिश के चलते हुई है। पुलिस ने इस हिंसा में राजनीति होने से इंकार किया है। वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह घटना राज्य और राज्य सरकार की छवि खराब करने के लिए एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। वहीं तृणमूल के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि भादु शेख क्षेत्र के एक चहेते नेता थे। उनकी मौत पर गांव के लोग आक्रोशित थे। यह तेजी से स्पष्ट हो रहा है कि शांतिपूर्ण बंगाल में एक मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है। इस तरह तृणमूल को निशाना बनाते हैं। हत्या और उसके बाद की हत्याएं एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं। हालांकि, इससे पहले बीरभूम के तृणमूल जिलाध्यक्ष और क्षेत्र के पार्टी कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल ने कहा कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी हो सकती है।

राज्यपाल से सीएम ममता का टकराव
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल धनखड़ ने सोशल मीडिया पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भयानक हिंसा और आगजनी का तांडव (Birbhum Violence Case) रामपुरहाट बीरभूम इंगित करता है कि राज्य हिंसा संस्कृति और अराजकता की चपेट में है। पहले ही आठ लोगों की जान चली गई है। मुख्य सचिव से इस घटना पर तत्काल अपडेट मांगा है। वहीं एक वीडियो संदेश में यह भी कि यह राज्य में एक बहुत ही खतरनाक स्थिति को इंगित करता है। कानून और व्यवस्था नाक-भौं सिकोड़ रही है। उन्होंने पश्चिम बंगाल को मानवाधिकारों के उल्लंघन की प्रयोगशाला तक बता डाला। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने धनखड़ को लिखे एक पत्र में कहा कि यह मुझे पीड़ा देता है कि आपने एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना को चुना है। इसमें राज्य की छवि खराब करने की एक बड़ी राजनीतिक साजिश की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। सीएम ने राज्यपाल से अनुचित बयान देने से बचने की अपील की और सच पता लगाने के लिए निष्पक्ष जांच करने और घटना में शामिल लोगों के विरुद्ध उचित कर्रवाई की अनुमति देने की मांग की।

बंगाल में अनुच्छेद 355 लागू करने की मांग
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। अब बंगाल में लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बीरभूम हिंसा की जांच एसआईटी से कराने का कोई फायदा नहीं है। इस घटना को लेकर मैं राष्ट्रपति से मिलूंगा। उन्हें राज्य में अनुच्छेद 355 लागू करने पर विचार करने का सुझाव दूंगा।

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