माता का जयकारा क्यों लगा रहे हैं राहुल गांधी?
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात की अपनी चुनावी रैलियों में जय सरदार के साथ-साथ जय भवानी के भी नारे लगा रहे हैं और तकरीबन दर्जन भर मंदिरों के दर्शन भी कर चुके हैं.
राज्य में सत्तारुढ़ बीजेपी इसको लेकर उन पर तंज़ भी कस रही है. मेहसाणा में इसका जवाब सोमवार को राहुल गांधी ने ख़ुद दिया. उन्होंने कहा कि वह भगवान शिव के भक्त हैं और विरोधियों को जो कहना है वह कहें, उनका सत्य उनके साथ है.
कांग्रेस जिस तरह से मंदिरों को तवज्जो दे रही है उस पर गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार अजय उमट कहते हैं कि भरत सिंह सोलंकी के राज्य का पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद यह सोची समझी रणनीति के तहत दो साल से चल रहा है.
वह कहते हैं, "कांग्रेस का गुजरात में हिंदुत्व की ओर बढ़ने का एक उदाहरण है कि उसकी पार्टी ने राज्य में इफ़्तार पार्टी तक बंद कर दी है क्योंकि बीजेपी हमेशा उस पर मुस्लिमों का तुष्टिकरण करने का आरोप लगाती थी."
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पहले से खेलती रही है कांग्रेस हिंदुत्व कार्ड
इसके उलट जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के पूर्व प्रोफ़ेसर रहे और गुजरात के राजनीतिक विश्लेषक घनश्याम शाह कहते हैं कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राजनीति कर रही है.
वह कहते हैं, "गुजरात में नरेंद्र मोदी के आने के बाद हिंदुत्व की राजनीति में इज़ाफ़ा हुआ है लेकिन कांग्रेस उससे पहले 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राजनीति करती रही है और राहुल गांधी को भी इस बात को स्थापित करना पड़ा है."
कांग्रेस और बीजेपी के हिंदुत्व में अंतर देखा जाता रहा है. कांग्रेस को सेक्युलर पार्टी समझा जाता है जबकि बीजेपी को हार्डकोर हिंदुत्व की राजनीति करने वाली पार्टी के रूप में देखा गया है.
बीजेपी हिंदुत्व बनाम कांग्रेस हिंदुत्व
घनश्याम शाह भी इस बात को स्वीकार करते हैं. हालांकि, वह कहते हैं कि कांग्रेस बीजेपी के हिंदुत्व की बराबरी नहीं कर सकती है और इस ख़ास राजनीति की बीजेपी पुरोधा है.
वहीं, अजय उमट कहते हैं कि इसमें किसी का हिंदुत्व किसी पर भारी नहीं पड़ रहा है लेकिन कांग्रेस को बताना पड़ रहा है कि वह हिंदुत्व के साथ है.
उमट कहते हैं, "कांग्रेस बताना चाहती है कि वह मुस्लिमों का तुष्टिकरण नहीं कर रही है लेकिन इसके उलट बीजेपी भी मुस्लिमों के प्रति हमदर्दी दिखा रही है. हाल में जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे के साथ प्रधानमंत्री मोदी का अहमदाबाद की मस्जिद में जाना यह साफ़ दिखाता है. मोदी को हिंदू हृदय सम्राट समझा जाता है जबकि वह ख़ुद को मुस्लिमों का हमदर्द दिखा रहे हैं."
बीजेपी और उसका मंदिर प्रेम किसी से छिपा नहीं है और इसको बताने की ज़रूरत भी नहीं है. गुजरात में कांग्रेस के जागे मंदिर प्रेम को वरिष्ठ पत्रकार श्याम पारेख एक रणनीति बताते हैं.
वह कहते हैं, "अगर ऐसा न होता तो बीजेपी को सीधे-सीधे कांग्रेस पर हमला करने का मौका मिल जाता इसलिए वह ख़ुद को भी बीजेपी के बराबर दिखा रही है."
गुजरात चुनाव के मद्देनज़र सोशल मीडिया पर एक युद्ध सा छिड़ा हुआ है. जहां कांग्रेस का एक नारा सोशल मीडिया पर ट्रेंड करता रहा. वहीं, सोशल मीडिया की दिग्गज बीजेपी भी इसमें पीछे नहीं रही.
घनश्याम शाह कहते हैं कि सोशल मीडिया पर हिंदू राष्ट्र के नारे अब तक छाए हुए हैं और उसमें बताया जाता है कि वह केवल नरेंद्र मोदी ही बना सकते हैं.
वह कहते हैं, "गुजरात के संदर्भ में हिंदुत्व का पर्याय हिंदू राष्ट्र है और इसे टक्कर देने में कांग्रेस किसी के समान नहीं दिखती."
वहीं, उमट कहते हैं कि बीजेपी का रिकॉर्ड रहा है कि उसके उम्मीदवार मुस्लिम इलाकों में पर्चा बांटने भी नहीं जाते थे लेकिन हाल में उसके कई उम्मीदवार और बड़े नेता मुस्लिम नेताओं से मिलते रहे हैं और उन इलाकों में जाते रहे हैं.
कांग्रेस को मिलेंगे वोट?
कांग्रेस की रणनीति पर श्याम कहते हैं कि वह तकरीबन 25 सालों में पहली बार कांग्रेस को गुजरात में मज़बूती से चुनाव लड़ते हुए देख रहे हैं.
वह कहते हैं, "कांग्रेस मज़बूती से लड़ ज़रूर रही है लेकिन बीजेपी को छोड़कर वोटर कांग्रेस को वोट देंगे यह बड़ा सवाल है."
श्याम कहते हैं कि नरेंद्र मोदी का साथ छोड़कर लोग राहुल गांधी को चुनेंगे यह अभी तक पूरी तरह नहीं दिख रहा है लेकिन लोग मोदी सरकार के काम से ख़ुश भी नहीं हैं.
इन सबसे इतर घनश्याम शाह मंदिर जाने को गलत नहीं मानते हैं लेकिन वह कहते हैं कि इसका इस्तेमाल राजनीति के लिए नहीं होना चाहिए.
कांग्रेस या बीजेपी किसके हिंदुत्व की रणनीति की जीत होती है यह अब तो 18 दिसंबर को ही पता चलेगा जब वोटों की गिनती होगी.
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