कैसे रायबरेली में भी बढ़ी कांग्रेस की मुसीबत, लोकसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी ने कर दिया बड़ा 'खेल'
यूपी में हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है। पहले में तो उसे यह कामयाबी मिली है कि उसने आठवें उम्मीदवार के रूप में संजय सेठ को उतारा और इसके लिए जरूरी विधायकों की संख्या न होने पर भी उन्हें राज्यसभा पहुंचा दिया।
लेकिन, अब लग रहा है कि बीजेपी की रणनीति इतनी भर नहीं है। उसने राज्यसभा चुनाव के माध्यम से लोकसभा की उन कमजोर सीटों को भी साधने की कोशिश की है, जिसे वह अपने लिए चुनौती मानती है।

सपा विधायकों की क्रॉस-वोटिंग और बीजेपी की हो गई सेटिंग
मंगलवार को समाजवादी पार्टी के कम से कम 7 विधायकों की ओर से भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की बात सामने आ रही है। पार्टी को अपने आठवें प्रत्याशी संजय सेठ को जिताने के लिए अतिरिक्त मतों की आवश्यकता थी। राज्यसभा चुनाव में खेला होने वाला है, यह आशंका तभी पैदा हो गई थी, जब सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के डिनर से पार्टी के 8 विधायक गायब थे।
मंगलवार सबेरे जब समाजवादी पार्टी के चीफ व्हिप मनोज पांडे ने वोटिंग से पहले इस्तीफा दिया तो बदलाव का पहला रुझान भी आ गया। ऊंचाहार से पार्टी के दिग्गज एमएलए के साथ अन्य विधायक जब उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के साथ नजर आए तो सारा संदेह दूर हो गया।
क्रॉस-वोटिंग करने वाले एमएलए हो सकते हैं बीजेपी उम्मीदवार
जानकारों की राय में भाजपा ने सपा विधायकों को तोड़कर दो हित साध लिए हैं। एक तो लोकसभा चुनाव से पहले ही समाजवादी पार्टी और इंडिया ब्लॉक के मनोबल पर चोट कर दिया है।
संभावना है कि क्रॉस-वोटिंग करने वाले एमएलए लोकसभा चुनावों में उन सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी के रूप में नजर आएं, जिसे बीजेपी ने अपने लिए कमजोर चिन्हित कर रखा है। इसमें रायबरेली और अंबेडकरनगर जैसी सीटें शामिल हैं।
रायबरेली से 2022 में कांग्रेस का हो गया था सफाया
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी की अदिति सिंह ने सिर्फ रायबरेली सदर सीट से जीत दर्ज की थी। रायबरेली लोकसभा सीट की अन्य चारों विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा हुआ था।
बड़े ब्राह्मण चेहरे माने जाते हैं मनोज पांडे
पिछले विधानसभा चुनाव से पहले तक रायबरेली को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। लेकिन, मनोज कुमार पांडे के पाला बदलने से अब क्षेत्र का समीकरण बदल जाने की संभावना मानी जा रही है। वह क्षेत्र के बहुत ही मजबूत ब्राह्मण चेहरे माने जाते रहे हैं।
गांधी परिवार की रायबरेली में बढ़ सकती है मुश्किल
माना जा रहा है कि बीजेपी उन्हें रायबरेली से लोकसभा चुनाव का टिकट भी दे सकती है। अगर ऐसा हुआ तो इस लोकसभा क्षेत्र में गांधी परिवार की चुनौती और बढ़ सकती है। क्योंकि, सोनिया गांधी पहले ही राजस्थान से राज्यसभा पहुंच चुकी हैं।
कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि उनकी जगह गांधी परिवार से ही कोई अपना किला बचाने के लिए उतरेगा। सबसे ज्यादा अटकलबाजियां प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम की लग रही है।
रायबरेली ही नहीं, पड़ोस की अमेठी लोकसभा सीट में भी कांग्रेस पार्टी विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। जबकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी वहां खुद भी हार चुके हैं।
इन दोनों ही सीटों पर इंडिया ब्लॉक में सीटों के बंटवारे के बाद उम्मीद थी कि कांग्रेस पार्टी को इस सीटों पर समाजवादी पार्टी के जनाधार का फायदा मिलेगा। लेकिन, भाजपा ने उसी जनाधार में सेंध लगाकर बहुत बड़ी व्यूह रचना की है।












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