272 से कम आईं NDA की सीटें तो विपक्ष के पास है सीक्रेट प्लान
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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा की अब उल्टी गिनती शुरू हो गई है। तमाम राजनीतिक दल नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि नतीजों से पहले तमाम एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई में एनडीए को पूर्ण बहुमत मिलता दिख रहा है, लेकिन विपक्ष को इस बात का भरोसा है कि नतीजे एग्जिट पोल के आंकड़ों से अलग होंगे। यही वजह है कि तमाम विपक्षी दल लगातार एकजुट होकर सरकार बनाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। बहुमत के आंकड़े के लिए कुल 272 सीटों की जरूरत है, ऐसे में अगर अगर एनडीए बहुमत के आंकड़े से दूर रहता है तो विपक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करने में बिल्कुल भी देरी करने के मूड में नहीं है, लिहाजा विपक्षी दल इस बात की योजना बना रहे हैं कि ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द सरकार बनाने का दावा पेश किया जाए।

रणनीति को लेकर हुई अहम बैठक
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार पिछले हफ्ते वरिष्ठ कांग्रेस नेता जिसमे खुद पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल हुए थे, उसमे नतीजों के दिन की रणनीति बनाई गई थी। इस बैठक में वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल, अभिषेक मनु सिंघवी के बीच मैराथन बैठक हुई थी। यह बैठक राहुल गांधी के आवास पर हुई थी। इस पूरी बैठक से वाकिफ दो वरिष्ठ नेताओं ने इस बात की जानकारी दी है। बैठक के दौराान कुछ ड्राफ्ट पर भी चर्चा की गई, जिसमे पार्टी की लीगल टीम ने तैयार किया है, जिसमे अभिषेक मनु सिंघवी शामिल हैं। इसमे इस बात पर चर्चा है कि कैसे अलग-अलग दल एनडीए को अपना समर्थन दे सकते हैं।

जल्द से जल्द पेश करेंगे दावा
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बताया कि अगर लोकसभा में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलता है तो हमे जल्द से जल्द राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात करनी चाहिए, जिससे की हम सरकार बनाने के अवसर को गंवा ना दें। एनडीए को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में हम कर्नाटक की तर्ज पर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। हालांकि इस बारे में अंतिम फैसला यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और राहुल गांधी लेंगे। बता दें कि कर्नाटक में कांग्रेस ने बहुत ही कम समय में सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया था। पार्टी ने मुख्यमंत्री की कुर्सी जेडीएस को देकर बड़ा दांव खेला था, बावजूद इसके कि कांग्रेस के पास जेडीएस की तुलना में कहीं अधिक सीटें थी।
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सभी विकल्प पर चर्चा
साधारण स्थिति में चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद राजनीतिक दल इस बात का इंतजार करते हैं कि राष्ट्रपति सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए न्योता दें। लेकिन इस बार कांग्रेस भाजपा के खिलाफ नई रणनीति तैयार कर रही है, जिससे कि अगर एनडीए को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तो सरकार बनाने का मौका ना गंवा दे। इस बार कांग्रेस सरकार बनाने के किसी भी वैधानिक विकल्प को छोड़ना नहीं चाहती है, लिहाजा इसे लेकर पार्टी के भीतर रणनीति तैयार की जा रही है।

राष्ट्रपति का अधिकार
आपको बता दें कि भारतीय संविधान के अनुसार राष्ट्रपति को यह अधिकार होता है कि वह किसी दल या दलों के समूह को स्थिर सरकार बनाने का न्योता दें। सबसे बड़ी पार्टी को अन्य दलों की तुलना में पहले न्योता दिया जाता है। 2004 में राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने कांग्रेस की मुखिया सोनिया गांधी को सरकार बनाने का न्योता दिया था। उस वक्त कांग्रेस के पक्ष में सिर्फ 145 सीटें थी, जबकि भाजपा ने 138 सीटों पर जीत दर्ज की थी। सरकार बनाने का न्योता मिलने के बाद कांग्रेस ने तमाम दलों के साथ गठबंधन करके सरकार का गठन किया था।

क्षेत्रीय दलों से चर्चा
जानकारी के अनुसार कांग्रेस ने इस रणनीति पर पहले ही तमाम क्षेत्रीय दलों से चर्चा कर ली है। जिसमे मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, सीपीआई नेता सीताराम येचुरी, सपा मुखिया अखिलेश यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती, शामिल हैं। वहीं कांग्रेस के नेता का कहना है कि येचुरी इस पक्ष में नहीं हैं कि सभी विपक्षी दलों को सरकार बनाने के दावे पर एक साथ हस्ताक्षर करने चाहिए, क्योंकि आप, टीआरएस और बीजेडी ऐसा करने में सहज नहीं रहेंगे। येचुरी का कहना है कि हम सब इस बार एक साथ मिलकर चुनाव भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए लड़ रहे हैं। नतीजों आने के बाद स्थिति पर चर्चा की जाएगी।












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