राहुल गांधी ने रवीन्द्रनाथ टैगोर को उनकी पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि
नई दिल्ली, 7 अगस्त: देश का राष्ट्रगान लिखने वाले गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की आज पुण्यतिथि है। 7 अगस्त 1941 को उन्होंने अंतिम सांस ली थी। आज पुण्यतिथि पर पूरा देश रवीन्द्रनाथ टैगोर को याद कर रहा है। इस बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने भी उनको नमन किया। साथ ही अपने ट्वीट में उनकी किताब गीतांजलि की एक कविता की कुछ लाइनों का जिक्र किया।

राहुल गांधी ने ट्वीट कर लिखा कि जहां मन बिना भय के हो और सिर ऊंचा रखा जाता है, जहां सच की गहराई से शब्द निकलते हैं...स्वतंत्रता के उस स्वर्ग में, मेरे पिता, मेरे देश को जगाने दो (Where the mind is without fear and the head is held high...Where words come out from the depth of truth...Into that heaven of freedom, my father, let my country awake), गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
वहीं कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा कि हम नोबेल शांति पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। एक कवि, चित्रकार, उपन्यासकार, संगीतकार, पत्रकार, वक्ता और दार्शनिक, जिन्होंने अपने ज्ञान के शब्दों से जनता को प्रेरित किया और भारत को अपना राष्ट्रगान दिया।
कैसे हुई थी मृत्यु?
आपको बता दें कि टैगोर नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले एशियाई व्यक्ति थे। ये सम्मान उनकी रचना गीतांजलि के लिए 1913 में मिला था। 7 मई 1861 को कोलकाता में जन्मे टैगोर की मृत्यु 1941 में हुई थी। वैसे तो उस वक्त किसी को उनके निधन की वजह नहीं पता थी, लेकिन रबींद्र भारती यूनिवर्सिटी ने उनके आखिरी वक्त की पड़ताल की। जिसमें पता चला कि टैगोर को प्रोस्टेट कैंसर था। इस वजह से उनके यूरिनरी ब्लैडर में बहुत ज्यादा इंफेक्शन हो गया। बाद में यही उनकी मृत्यु की वजह बनी।












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