आपातकाल के 45 साल पूरे होने पर कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने कहा- लोकतंत्र का परीक्षण करने पर वो वापस लड़ता है
नई दिल्ली। देश में 25 जून, साल 1975 को लगाए गए आपातकाल को आज 45 साल पूरे हो गए हैं। इस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने आपातकाल की घोषणा की थी। देश में साल 1975 से लेकर 1977 तक आपातकाल लगा था और इस दौरान बहुत कुछ ऐसा हुआ था, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस बारे में साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि आपातकाल में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ था, इसी कारण आज भी कांग्रेस को आपातकाल के लिए कोसा जाता है।

इस मौके पर कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने ट्वीट किया है। उन्होंने कहा है, 'हमें आपातकाल इस बात की याद दिलाता है कि जब-जब लोकतंत्र का परीक्षण किया जाता है, तब-तब वो पूरी ताकत के साथ वापस लड़ता है। ये राजनीतिक पार्टियों पर भी लागू होता है। लोकतांत्रिक संगठन बेहतर तरीके से चुनौतियों को पार कर पाते हैं। लोकतंत्र निरंतर कार्य है, जिसमें प्रतिबद्धता, बलिदान और ईमानदार आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता होती है।'
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इसके अलावा दूसरी ओर भाजपा ने गुरुवार को एक वीडियो शेयर किया है। जिसका शीर्षक है, '25 जून 1975, आपातकाल लोकतंत्र का काला अध्याय।' इसके साथ ही भाजपा ने ट्वीट कर कहा है, 'कांग्रेस की काली करतूत और भारतीय लोकतंत्र के सबसे दुःखद अध्याय 25 जून 1975 आपातकाल के विरोध में उठे हर स्वर का हृदय से वंदन। कांग्रेस ने नागरिक स्वतंत्रता को बुरी तरह से कुचल डाला और समाचार पत्रों पर पूरी सख्ती के साथ सेंसरशिप लागू करवाई। संसद को दरकिनार कर अधिकारपत्र के जरिए आपातकाल जारी रखने के लिए इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति से बार-बार 'आर्डिनेंस' हासिल किए।'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है, 'आज से ठीक 45 वर्ष पहले देश पर आपातकाल थोपा गया था। उस समय भारत के लोकतंत्र की रक्षा के लिए जिन लोगों ने संघर्ष किया, यातनाएं झेलीं, उन सबको मेरा शत-शत नमन! उनका त्याग और बलिदान देश कभी नहीं भूल पाएगा।'












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