राजनीति के 'वडाकरा के शेर' K.P. Unnikrishnan का निधन, सद्दाम हुसैन से टकराकर बचाई थी 1.5 लाख भारतीयों की जान
भारतीय राजनीति के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री के.पी. उन्नीकृष्णन का मंगलवार तड़के कोझिकोड के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। 89 वर्षीय उन्नीकृष्णन पिछले काफी समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी अमृता और दो बेटियां हैं। उनके निधन की खबर से केरल सहित पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने पूर्व केंद्रीय मंत्री के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उन्नीकृष्णन ने संसदीय राजनीति में जो मानक स्थापित किए, वे हमेशा याद रखे जाएंगे।

वडाकरा का अटूट किला
केरल के राजनीतिक इतिहास में एक ही लोकसभा क्षेत्र (वडाकरा) से सबसे लंबे समय (1971 से 1996) तक सांसद रहने का दुर्लभ रिकॉर्ड उनके नाम है। वे लगातार 6 बार सांसद चुने गए।
सद्दाम हुसैन से सीधी टक्कर
1989-90 में वी.पी. सिंह सरकार में दूरसंचार और जहाजरानी मंत्री रहते हुए उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया। खाड़ी युद्ध के दौरान जब 1.5 लाख भारतीय कुवैत में फंसे थे, तब उन्होंने कैबिनेट की सलाह के खिलाफ जाकर इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के गुप्त ठिकाने पर उनसे मुलाकात की और भारतीयों की सुरक्षित वापसी का रास्ता साफ किया।
स्वतंत्रता सेनानी परिवार से नाता
20 सितंबर 1936 को जन्मे उन्नीकृष्णन बचपन से ही समाजवादी विचारों से ओत-प्रोत थे। वे शुरू में इंदिरा गांधी के कट्टर समर्थक थे, लेकिन आपातकाल और संजय गांधी से मतभेदों के बाद उन्होंने कांग्रेस से अलग राह चुन ली थी। उन्होंने कांग्रेस के अलावा कांग्रेस (U) और कांग्रेस (S) का भी प्रतिनिधित्व किया। साल 1995 में वे वापस मुख्यधारा की कांग्रेस में लौटे थे।
के.पी. उन्नीकृष्णन: राजनीतिक सफरनामा
- जन्म: 20 सितंबर 1936 (कोयिलैंडी, कोझिकोड)।
- संसदीय रिकॉर्ड: 1971, 1977, 1980, 1984, 1989 और 1991 में लगातार जीत।
- केंद्रीय जिम्मेदारी: वी.पी. सिंह कैबिनेट (1989-90) में दूरसंचार, जहाजरानी और भूतल परिवहन मंत्री।
- ऐतिहासिक कार्य: खाड़ी युद्ध के दौरान कुवैत से 1.5 लाख से अधिक भारतीयों का सफल रेस्क्यू
- राजनीतिक दल: कांग्रेस, कांग्रेस (U), और कांग्रेस (S)।












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