जयराम रमेश ने बीजेपी के जनसंख्या एजेंडे पर सवाल उठाए, सरकारी आंकड़ों के सहारे बोला हमला
नई दिल्ली, जुलाई 17: संसद के मानसून सत्र में भाजपा सांसदों द्वारा जनसंख्या नियंत्रण पर एक निजी सदस्य विधेयक लाने की उम्मीद है। अब इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश की ओर से बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकारी दस्तावेजों के हवाले से बताया कि 2031 तक सभी राज्यों में जन्मदर प्रतिस्थापन स्तर से कम हो जाएगी। लोकसभा में बीजेपी सांसद रवि किशन (भाजपा) और राज्यसभा में प्रो. राकेश सिन्हा द्वारा इस विधेयक को पेश करने की उम्मीद है।

यह कदम उत्तर प्रदेश विधि आयोग द्वारा अपनी वेबसाइट पर जनसंख्या नियंत्रण पर एक मसौदा विधेयक पर 19 जुलाई तक जनता से सुझाव आमंत्रित करने के बाद सामने आया है। इसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में दो से अधिक बच्चे वाले लोगों को चुनाव लड़ने से रोक दिया जाएगा। इसके अलावा सरकारी नौकरी, सब्सिडी समेत कई अन्य सुविधाओं से वंचित कर दिया जाएगा। रमेश ने कहा कि यूपी में इस साल चुनाव होने हैं ऐसे में भाजपा की ओर से इस "गैर-सूचित" बहस ट्रिगर किया है।
जयराम रमेश ने इस मामले पर एक के बाद एक कई ट्वीट कर इस तरह के कानून को लाने की निरर्थकता को समझाया है। उन्होंने कहा कि, राज्यों ने प्रजनन क्षमता के प्रतिस्थापन स्तर को हासिल कर लिया है। डेमोग्राफी में महत्वपूर्ण टिपिंग पॉइंट तब होता है जब प्रजनन क्षमता का प्रतिस्थापन स्तर 2.1 तक पहुंच जाता है। इसके एक या दो पीढ़ी के बाद, जनसंख्या या तो स्थिर हो जाती है या घटती है। केरल 1988 में इसे हासिल करने वाला पहला और पांच साल बाद तमिलनाडु था।
जयराम रमेश ने कहा कि, अब तक, भारत के अधिकांश राज्यों ने प्रजनन क्षमता के प्रतिस्थापन स्तर को हासिल कर लिया है। 2026 तक, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश भी ऐसा कर लेंगे, जिसमें सबसे अंतिम राज्य बिहार भी 2030 तक कर लेगा। मुझे संदेह है कि भाजपा में ज्यादातर लोग इस बुनियादी तथ्य से अवगत हैं, जो मोदी सरकार द्वारा जुलाई 2019 में संसद में पेश किये गए अपने 2018-19 के आर्थिक सर्वेक्षण में दर्शाया गया था। आप स्वयं देखें।
उन्होंने 2018-19 के आर्थिक सर्वेक्षण में दिए प्रजनन दर संबंधी आंकड़े साझा करते हुए कहा, आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 में मोदी सरकार के अपने अनुमान से, कुछ राज्यों को 2031 तक बढ़ती वृद्ध - आबादी के लिए तैयार रहना होगा, न कि बढ़ती जनसंख्या के लिए। यह महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए मौजूदा नीतियों, परिवार नियोजन कार्यक्रमों और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों से प्रभावित होगा।












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