भारत पोस्ट की बुक पैकेट सेवा बंद करने पर बोले गौरव गोगोई, कहा-'साहित्यिक समुदाय के लिए कठिनाई भरा कदम'

कांग्रेस नेता और लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई ने सरकार के भारत पोस्ट की बुक पैकेट सेवा बंद करने के फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। गोगोई ने इसे साहित्यिक समुदाय के लिए कठिनाई भरा कदम बताते हुए कहा कि इस फैसले से शिक्षा, व्यक्तिगत विकास और दुनिया से जुड़ाव के लिए किताबों पर निर्भर करोड़ों भारतीयों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

गोगोई ने केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र लिखकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस सेवा को बंद करने से छोटे शहरों और गांवों के पाठकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि यह सेवा किताबें प्राप्त करने का सबसे सुलभ और किफायती तरीका था।

gourav gogoi

50 प्रतिशत बढ़ी लागत से किताबें होंगी महंगी

गोगोई ने बताया कि 18 दिसंबर को भारत पोस्ट ने इस सेवा को बंद कर दिया और इसके विकल्प के तौर पर स्पीड पोस्ट और रजिस्टर्ड पोस्ट जैसे महंगे विकल्प पेश किए। जिनकी लागत लगभग 50 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि इस कीमत वृद्धि से विशेष रूप से छोटे और स्वतंत्र प्रकाशकों को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ेगा। इसमें उन प्रकाशकों को विशेष रूप से नुकसान होगा जो क्षेत्रीय भाषाओं, विशेष शैलियों और सीमित पाठक वर्गों के लिए किताबें प्रकाशित करते हैं।

ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के पाठकों पर असर

गोगोई ने कहा कि बुक पैकेट सेवा के तहत प्रकाशक 200 पन्नों तक की किताबें सिर्फ 20-25 रुपये में देशभर में भेज सकते थे। यहां तक कि वजन अधिक होने पर भी बुक पैकेट का खर्च 30 रुपए से अधिक नहीं होता था। यह सस्ती दर ग्रामीण और दूरदराज के पाठकों के लिए किताबें सुलभ बनाती थी। जहां निजी कूरियर सेवाएं महंगी या अनुपलब्ध होती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि नए और महंगे पोस्टल दरों के कारण किताबों तक पहुंच सीमित हो जाएगी। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो पहले से ही पढ़ने की सामग्री प्राप्त करने में बाधाओं का सामना कर रहे हैं।

साहित्यिक समुदाय को होगा नुकसान

गोगोई ने कहा कि इस सेवा का बंद होना एक ऐसा कदम है। जो बिना किसी आर्थिक बोझ के लोगों को किताबें उपलब्ध कराने की सुविधा खत्म कर देता है। यह एक साक्षर, जागरूक और समान समाज के निर्माण के उद्देश्य के विपरीत है।

तुरंत निर्णय वापस लेने की मांग

गोगोई ने सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की और कहा कि यह कदम लाखों भारतीयों की शिक्षा और व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक किताबों की उपलब्धता पर सीधा असर डालेगा। उन्होंने इस मुद्दे को गंभीरता और तात्कालिकता से हल करने का अनुरोध किया।

नई पोस्ट ऑफिस एक्ट की जरूरत पर सवाल

गोगोई ने माना कि नई पोस्ट ऑफिस एक्ट के कारण पोस्टल सेवाओं में बदलाव आवश्यक हो सकता है। लेकिन यह भी कहा कि इन परिवर्तनों को छोटे प्रकाशकों और पाठकों पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए लागू करना चाहिए।

यह निर्णय साहित्यिक समुदाय के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां किताबें पहुंचाने के सीमित विकल्प हैं। गोगोई ने इस फैसले को न केवल किताबों की पहुंच में बाधा। बल्कि भारत के ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को प्रभावित करने वाला कदम बताया।

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