गुजरात विधानसभा चुनाव: तिकड़ी नहीं चौकड़ी है कांग्रेस के साथ, चौथा है ‘बाहुबली’
गुजरात चुनाव में कांग्रेस के साथ आई तिकड़ी हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी की तो चौतरफा चर्चा हो रही है, लेकिन चौकड़ी के बारे में किसी को नहीं मालूम।
नई दिल्ली। गुजरात चुनाव में कांग्रेस के साथ आई तिकड़ी हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी की तो चौतरफा चर्चा हो रही है, लेकिन चौकड़ी के बारे में किसी को नहीं मालूम। इस तिकड़ी के साथ चौथा सदस्य भी है जिनका नाम है महेश मसावा। ये भारतीय ट्राइबल पार्टी के मुखिया हैं और पहले भी भीलिस्तान टाइगर सेना के बैनर तले अपनी गतिविधियां चलाते थे। इस पार्टी का अपना अलग इतिहास है और अपने इलाके में दबदबा। पार्टी को कांग्रेस ने पांच सीटें दी हैं और खुद महेश वसावा भी चुनाव लड़ रहे हैं। ये महेश वसावा कौन हैं ये भी आपको बताते हैं। गुजरात में जनता दल यूनाइटेड के विधायक छोटू भाई बसावा को जानते होंगे, महेश उन्हीं के बड़े बेटे हैं।

राज्यसभा चुनाव के वक्त सुर्खियों में आए थे वसावा
छोटू भाई वसावा जदयू के गुजरात में कर्ताधर्ता हैं और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के राज्यसभा चुनाव के दौरान छोटू भाई वसावा सुर्खियों में आए थे। उनका वोट अहमद पटेल के लिए सबसे अहम माना गया था। यदि छोटू भाई साथ नहीं होते तो बीजेपी की रणनीति फेल नहीं होती। उसी वक्त जदयू में नीतीश कुमार ने करवट बदली और वो बीजेपी के साथ चले गए लेकिन छोटू भाई वसावा शरद यादव के नजदीक थे और उन्होंने बीजेपी से हाथ नहीं मिलाया। अब वो कांग्रेस के साथ हैं।

आदिवासी इलाकों में है दबदबा
उनके बेटे महेश वसावा देहियावाड़ा के पूर्व विधायक हैं। जून,2016 में उन्होंने भारतीय ट्राइबल पार्टी का गठन किया। इसे चुनाव आयोग से राजनीतिक दल की मान्यता भी मिल गई। पार्टी आदिवासियों के उत्थान के लिए बनी है। महेश के पिता यानि छोटू भाई वसावा का आदिवासी इलाकों में खासा प्रभाव है और लोग उन्हें आदिवासियों के राबिनहुड कहते हैं। एनडीए के वक्त वो बीजेपी के नजदीक रहे पर अब कांग्रेस के साथ हैं और उनके बेटे महेश भी।

वसावा पर 24 आपराधिक मामले दर्ज
आज इनकी चर्चा इसलिए भी कर रहे हैं क्योंकि दो संस्थानों ने हाल ही में पहले चरण के उम्मीदवारों के बारे में आंकड़ों पर आधारित जो विश्लेषण किया है उसमें आपराधिक मामलों में महेश वसावा सबसे आगे हैं। इनके खिलाफ सबसे ज्यादा 24 मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या का मामला भी शामिल हैं। खुद छोटू भाई वसावा कह चुके हैं कि बीजेपी उनकी हत्या करा सकती है और चुनाव आयोग से सुरक्षा की गुहार लगा चुके हैं। उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अहमद पटेल के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी का साथ न देने से वो निशाने पर हैं और गुजरात सरकार भी उनसे बदला लेना चाहती हैं, इसीलिए उनकी हत्या हो सकती है। यही नहीं उन पर छापे डलवाए जा रहे हैं। ये बात अलग है कि छोटू भाई वसावा खुद बाहुबली के तौर पर जाने जाते हैं।

कांग्रेस के लिए क्यों इतने खास हैं वसावा
छोटू भाई एनडीए के वक्त बीजेपी के साथ रहे हैं और अब कांग्रेस के साथ हैं। दरअसल उनकी राजनीति का तानाबाना आदिवासियों के इर्दगिर्द है और इसी राजनीति के दम पर वो राजनीतिक दलों की जरूरत बने हुए हैं। उनके बेटे महेश भी उन्हीं के नक्शेकदम पर हैं और इनका असर उन दो विधानसभा सीटों पर तो रहता ही जहां से ये चुनाव लड़ते हैं इनके अलावा भी आसपास के आदिवासी इलाकों में छोटू भाई और महेश वसावा का समर्थन मायने रखता है।












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