Lateral Entry: लेटरल एंट्री के मोदी सरकार के यू टर्न पर कांग्रेस ने कही ये बात
कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि नौकरशाही में लेटरल एंट्री के लिए विज्ञापन वापस लेने का केंद्र का फैसला पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक पार्टियों के प्रयासों के कारण हुआ है।
उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि केवल संविधान की शक्ति ही "तानाशाही शासन के अहंकार" का मुकाबला कर सकती है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस हर कीमत पर संविधान और आरक्षण प्रणाली की रक्षा करेगी। उन्होंने भाजपा की किसी भी "साजिश" को विफल करने की कसम खाई।
उनकी यह टिप्पणी केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा यूपीएससी की अध्यक्ष प्रीति सूदन को लिखे गए पत्र के बाद आई है, जिसमें उन्होंने विज्ञापन को रद्द करने के लिए कहा था ताकि हाशिए पर पड़े समुदायों को सरकारी सेवाओं में उनका उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
लैटरल एंट्री के खिलाफ कांग्रेस का अभियान
खड़गे ने इस घटनाक्रम का जश्न मनाते हुए कहा, "संविधान अमर रहे! दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक न्याय के लिए कांग्रेस पार्टी की लड़ाई ने आरक्षण छीनने की भाजपा की योजना को विफल कर दिया है।" उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक पार्टियों के अभियान के कारण ही सरकार पीछे हटी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक भाजपा-आरएसएस सत्ता में हैं, वे आरक्षण खत्म करने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाते रहेंगे।
विपक्ष की आलोचना और सरकार की प्रतिक्रिया
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सिंह के पत्र की आलोचना करते हुए इसे खराब शासन का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम स्पष्ट रूप से लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्षी नेताओं की आलोचना से प्रभावित है। कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने सरकार के निर्देश का स्वागत किया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विपक्ष की आवाज़ों को ज़्यादा सुनने की सलाह दी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और भविष्य के निहितार्थ
इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए, कांग्रेस सांसद मनिकम टैगोर ने टिप्पणी की, "2024 ने हमें दो परिणाम दिए हैं: एक कमज़ोर प्रधानमंत्री और विपक्ष का एक मज़बूत जन नेता। अंत में, यह हमारे संविधान की जीत है।" यूपीएससी ने 17 अगस्त को लेटरल एंट्री के ज़रिए 45 संयुक्त सचिवों, निदेशकों और उप सचिवों की भर्ती के लिए एक अधिसूचना जारी की थी। इस फ़ैसले को विपक्षी दलों की ओर से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा, जिन्होंने तर्क दिया कि यह ओबीसी, एससी और एसटी के आरक्षण अधिकारों को कमज़ोर करता है।
विवाद तब और बढ़ गया जब भाजपा के सहयोगी चिराग पासवान ने आरक्षण दिए बिना नियुक्तियाँ करने पर चिंता जताई। राहुल गांधी ने सरकार के इस कदम को दलितों, ओबीसी और आदिवासियों पर "हमला" बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा 'बहुजनों' से आरक्षण छीनना चाहती है।












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