कांग्रेस के 'वोट कटवों' के कारण पूर्वी यूपी की इन सीटों पर फायदे में बीजेपी

नई दिल्ली- पांचवें चरण के बाद कई ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं, जिसमें यह बात सामने आई है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) में यूपी के नतीजों को लेकर नया विश्वास जगा है। पार्टी के नेता अब प्रदेश में 60 से ज्यादा सीटें तक जीतने का अनुमान लगा रहे हैं। जबकि, पहले महागठबंधन के चलते कहीं न कहीं उसके होश उड़े हुए थे। शायद बीजेपी में आए इस उत्साह की वजह कांग्रेस के कई उम्मीदवार हैं, जो कुछ सीटों पर एसपी-बीएसपी (SP-BSP) को नुकसान ज्यादा और भाजपा को फायदा अधिक पहुंचा रहे हैं। यह स्थिति कांग्रेस की पूर्वी यूपी की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) के दावों से ठीक उलट नजर आ रही है। यहां हम पूर्वी यूपी की उन दो सीटों के बदले हुए समीकरणों के आधार पर यह विश्लेषण करेंगे कि कैसे उनकी दलीलें गलत साबित हो रही हैं।

देवरिया में यूं बदल दिया समीकरण

देवरिया में यूं बदल दिया समीकरण

भाजपा ने देवरिया (DEORIA)सीट पर धाकड़ एवं बुजुर्ग ब्राह्मण नेता कलराज मिश्र (Kalraj Mishra) की जगह इस बार दूसरे ब्राह्मण रामपति त्रिपाठी ( Ramapati Tripathi) को टिकट दिया है। यहां त्रिपाठी की स्थिति पहले से ही बेहतर मानी जा रही थी, ऊपर से कांग्रेस ने नियाज अहमद (Niyaz Ahmed) को उनके मुकाबले में उतराकर अलग से लीड दे दी है। क्योंकि यहां महागठबंधन की ओर से बीएसपी ने बीके जायसवाल (B K Jaiswal) को टिकट देकर यह सोचा था कि वो रामपति त्रिपाठी ( Ramapati Tripathi) को संसद पहुंचने से रोक देगी। लेकिन, कांग्रेस के कद्दावर मुस्लिम चेहरे की मौजूदगी ने बुआ-बबुआ का बना-बनाया खेल बिगाड़ दिया है। नियाज अहमद (Niyaz Ahmed) का यहां के मुसलमानों में बहुत अच्छी पकड़ मानी जाती है। 2014 में वह इसी सीट पर बसपा के टिकट पर लड़े थे और कलराज मिश्र के खिलाफ 2.3 लाख वोट हासिल करके दूसरे नंबर पर रहे थे। लेकिन, माया (Mayawati) ने इसबार जैसे ही उनका पत्ता काटा, राहुल-प्रियंका ने उन्हें लपकने में जरा भी देरी नहीं की। यही वजह है कि देवरिया (DEORIA) में बीजेपी के एक नेता ने इकोनॉमिक्स टाइम्स को बताया कि, "रामपति जी पहली बार बहुत अच्छे से चुनाव जीतने जा रहे हैं।"

संत कबीर नगर में भी बढ़ाई महागठबंधन की मुश्किल

संत कबीर नगर में भी बढ़ाई महागठबंधन की मुश्किल

संत कबीर नगर (SANT KABIR NAGAR) में भी कांग्रेस के चलते लगभग देवरिया (DEORIA) वाली ही स्थिति बन गई है। यहां कांग्रेस ने बालचंद्र यादव (Balchandra Yadav) को आनन-फानन में पार्टी में शामिल कराकर टिकट दिया है। यहां पर कांग्रेस ने पहले परवेज खान (Parvez Khan) को टिकट दिया था, लेकिन महागठबंधन के उम्मीदवार को देखते ही अपना उम्मीदवार बदलने का फैसला कर लिया। दो बार सांसद रहे बालचंद्र यादव (Balchandra Yadav) इलाके में काफी दबदबे वाले नेता माने जाते हैं और 2014 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर वह तीसरे नंबर पर रहे थे। लेकिन, यह सीट अखिलेश ने अपनी नई सहयोगी मायावती की पार्टी के खाते में दे दिया। यहां माया ने ब्राह्मण प्रत्याशी भीष्म शंकर (Bhishma Shankar) को यह सोचकर टिकट दिया कि शरद त्रिपाठी (Sharad Tripathi) का टिकट काटने के कारण ब्राह्मण वोटर भाजपा से बदला लेंगे। लेकिन, अब कांग्रेस उम्मीदवार यादव ही महागठबंधन पर भारी पड़ रहे हैं। उनका दावा है कि यादव एवं मुस्लिम वोटर गठबंधन को नहीं, बल्कि उन्हें वोट करेंगे।

बीजेपी ने ऐसे ठीक किया अपना समीकरण

बीजेपी ने ऐसे ठीक किया अपना समीकरण

जब भाजपा ने अपने जूता मार सांसद शरद त्रिपाठी (Sharad Tripathi) का संत कबीर नगर (SANT KABIR NAGAR) से घोर अनुशासनहीनता के आरोपों में टिकट काटा था। तब आशंका थी कि ब्राह्मण-ठाकुर की राजनीति का पार्टी को भयानक खामियाजा भुगतना पड़ेगा। क्योंकि, त्रिपाठी ने पार्टी के ही ठाकुर एमएलए की जूतों से पिटाई कर दी थी। लेकिन, भाजपा ने त्रिपाठी के पिता को बलिया से टिकट देकर ब्राह्मणों को नाराजगी का मौका ही नहीं दिया। ऊपर से हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए गोरखपुर के सांसद प्रवीण निषाद (Praveen Nishad) को संत कबीर नगर (SANT KABIR NAGAR) से उतारकर इस क्षेत्र के अलावा पूरे पूर्वांचल में निषादों का समर्थन भी बटोर लिया। एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने दावा किया है कि, "जिस समय से बालचंद्र यादव कांग्रेस की ओर से मैदान में उतरे और उनके लिए उसने अपने मौजूदा उम्मीदवार परवेज खान को बदला, उसी वक्त संत कबीर नगर में हमारी स्थिति अच्छी हो गई। "

प्रियंका ने क्या दावा किया था?

प्रियंका ने क्या दावा किया था?

कांग्रेस में पूर्वी यूपी का जिम्मा संभाल रहीं प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा था कि उनकी पार्टी ने एक रणनीति के तहत ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जिससे भाजपा को नुकसान पहुंचे। तब उन्होंने कहा था, "जहां उम्मीदवार मजबूत हैं, वहां कांग्रेस जीतेगी। जहां हमारे उम्मीदवार थोड़े हल्के हैं, वहां हमने ऐसे उम्मीदवार दिए हैं, जो बीजेपी का वोट काटे। कांग्रेस, बीजेपी का वोट काटेगी।" उनके 'वोट कटवा' वाले इस बयान पर अभी भी सियासी आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। बाद में प्रियंका ने सफाई दी थी कि कांग्रेस का एकमात्र मकसद बीजेपी को हराना है। लेकिन, सवाल उठता है कि अगर वो और उनकी पार्टी बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन को फायदा पहुंचाना चाहती हैं, तो फिर संत कबीर नगर (SANT KABIR NAGAR) और बलिया (DEORIA) में उन्होंने ऐसे कैंडिडेट क्यों उतारे हैं, जिससे बीजेपी को फायदा और माया-अखिलेश को नुकसान ज्यादा होने की आशंका है?

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