केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बड़ा दावा- भारत 6G दौर में बनेगा वैश्विक लीडर
भारत अब सिर्फ नई तकनीक अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि उसे गढ़ने और दुनिया को दिशा दिखाने वाला देश बनने की ओर बढ़ रहा है। इसी कड़ी में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 6जी टेक्नोलॉजी को लेकर भारत की बड़ी तैयारियों के बारे में बड़ा खुलासा किया।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मीडिया से बातचीत के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि दुनिया भर में 6जी टेक्नालाॅजी पर तेज़ी से विचार-विमर्श चल रहा है और भारत भी अब इस रेस में मजबूती से अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले तकनीक के विकास चरण में भारत की मौजूदगी बहुत सीमित रहती थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2023 में भारत 6जी एलायंस की स्थापना के बाद ये स्थिति बदल गई है।

सिंधिया ने कहा कि भारत का लक्ष्य काफी बड़ा है-6जी तकनीक के global rollout में कम से कम 10% IPR और पेटेंट भारत के हों। इसके लिए सात अहम 'वर्टिकल्स' बनाए गए हैं, जिनमें स्पेक्ट्रम, उपयोग के मामले (use cases), उपकरण निर्माण और हरित स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
उन्होंने भरोसा जताया कि भारत सिर्फ 6जी का उपयोग ही नहीं करेगा, बल्कि इसकी तकनीक और मानकों को तय करने में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा। मंत्री ने बताया कि वह हर तीन माह में इसकी समीक्षा करेंगे।
सिंधिया की अध्यक्षता में हुई त्रैमासिक समीक्षा बैठक में सात समर्पित कार्य समूहों ने अपनी प्रगति और भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत की। सिंधिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "उद्योग, उद्यमी और शिक्षाविद सहित सभी हितधारकों के प्रभावी सहयोग से, हम वैश्विक 6जी आईपी व मानकों में प्रमुख शक्ति बनने की दिशा में आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "भारत दूरसंचार की अगली पीढ़ी को आकार देने को दृढ़ है, अनुसरण करने को नहीं।" भारत 6जी मिशन स्पष्ट चरण-वार लक्ष्यों पर आधारित है, ताकि प्रत्येक नागरिक को इसका लाभ मिले।
अपनी पोस्ट में सिंधिया ने यह भी कहा, "भारत अगले दूरसंचार छलांग के लिए तैयार है।" 2023 में लॉन्च भारत 6जी विजन किफायत, स्थिरता व सर्वव्यापकता पर आधारित है। इसका लक्ष्य 2030 तक भारत को 6जी प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेता बनाना है।












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