एलोपैथी टिप्पणी मामला: दिल्ली हाई कोर्ट ने भेजा बाबा रामदेव को समन, 4 हफ्ते में देना होगा जवाब
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर: कोरोना महामारी के दौरान योग गुरु बाबा रामदेव ने एलोपैथी के खिलाफ कथित गलत टिप्पणी की थी, जिसके बाद मचा बवाल अभी तक शांत नहीं हुआ है। रामदेव की टिप्पणी का डॉक्टर्स ने जबरदस्त तरीके से विरोध किया था। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित रूप से गलत सूचना फैलाने के लिए कई डॉक्टर्स एसोसिएशनों के की ओर से दायर मुकदमे पर बुधवार को रामदेव को समन जारी किया है।

रामदेव को समन जारी करते हुए अदालत ने कहा कि यह याचिका महत्त्वहीन नहीं थी और इसकी संस्था के लिए एक मामला था। जस्टिस सी हरि शंकर ने रामदेव को मुकदमे पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि वह योग गुरु के खिलाफ वाद में लगे आरोपों के गुण-दोष पर अदालत कोई राय व्यक्त नहीं कर रही है और किसी भी राहत या अंतरिम आदेश पर बाद में विचार किया जाएगा।
वहीं न्यायाधीश ने रामदेव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव नायर से कहा कि "मैंने (रामदेव के) वीडियो क्लिप देखे हैं। वीडियो क्लिप के अवलोकन से आपके मुवक्किल एलोपैथिक उपचार प्रोटोकाल का तिरस्कार करते दिखाई दे रहे हैं। क्लिप के अवलोकन से निश्चित रूप से वाद पर सुनवाई का मामला बनता है। उनके (वादी) के पास निषेधाज्ञा के लिए कुछ भी नहीं हो सकता है, लेकिन मामला तुच्छ नहीं है।
इधर, वरिष्ठ वकील ने कहा कि उन्हें इस मामले में समन जारी करने पर कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन उन्होंने मामले में लगाए गए आरोपों का विरोध करते हैं। वकील नायर ने अदालत से आग्रह किया कि इस मुकदमे के तीन हिस्से हैं कोरोनिल, मानहानि और टीकाकरण के खिलाफ झिझक। अदालत नोटिस को केवल मानहानि तक सीमित कर सकती है। जिस पर पीठ ने कहा हम कोई आदेश नहीं पारित कर रहे हैं, आप अपना लिखित बयान दाखिल करें और कहें कि कोई मुकदमा नहीं बनता। अदालत ने जनवरी में अगली सुनवाई के लिए आदेश दिया।












Click it and Unblock the Notifications