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बासित के बयान पर भड़कीं शोभा डे, कहा- यह मुझे और देश को बदनाम करने की साजिश

नई दिल्ली। भारत में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत अब्दुल बासित के एक बयान ने वबाल मचा दिया है। बासित ने हाल ही में कहा था कि शोभा डे ने उनके कहे अनुसार पाकिस्‍तान के सपोर्ट में कश्‍मीर मुद्दे को लेकर एक लेख लिखा था। वहीं लेखिका शोभा डे ने पाकिस्‍तान के पूर्व उच्‍चायुक्‍त अब्‍दुल बासित के आरोपों का खंडन करते हुए उनके बयान को खतरनाक और दुर्भावनापूर्ण बताया है।

Columnist Shobhaa De responds to claims by Former Pakistan High Commissioner to India, Abdul Basit

बासित के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शोभा डे ने कहा कि, 'मैं अब्दुल बासित के इस दावे पर कोई जवाब नहीं देती, लेकिन झूठ का पर्दाफाश करना जरूरी है।अब्दुल बासित ना केवल मुझे बदनाम करने के लिए बल्कि भारत को बदनाम करने के लिए यह झूठी कहानी बना रहे हैं। मैं केवल एक बार उस व्यक्ति से मिली हूं। यह तब की बात है जब उसने खुद को आकर थोपने की कोशिश की और एक छोटे से समूह में घुस आया। यह बात इस साल जनवरी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान एक पब्लिशिंग पार्टी की थी।

शोभा डे ने कहा कि, अब्दुल बासित ने उस दौरान चर्चा में कई मुद्दे छेड़ने चाहे लकिन जैसे ही चीन का जिक्र हुआ वो भाग खड़ा हुआ। ये पहला मौका था जब मेरा उससे आमना सामना हुआ। मैं ऑन रिकॉर्ड कहना चाहती हूं कि वह बहुत खतरनाक खेल खेल रहा है। हम सच्चाई में विश्वास रखते हैं। हम सब देशभक्त और सच्चे भारतीय हैं। मुझे बहुत इंसल्ट महसूस हो रहा है कि उसने यह बात करने की हिम्मत कैसे दिखाई।

दरअसल इंटरव्‍यू में बासित ने दावा किया था कि जुलाई 2016 में हिज्‍बुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद कश्‍मीर में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्‍तेमाल किया जाने लगा था इसके अलावा आर्थिक नाकेबंदी भी की जा रही थी। लेकिन इसके बारे में कोई भी भारतीय पत्रकार कुछ नहीं लिख रहा था। उन्होंने इंटरव्यू में दावा किया गया तो, मेरे लिए यह चुनौतीपूर्ण कार्य था कि किसी पत्रकार को इस बात के लिए मनाया जाए कि वह कश्मीरियों के खुद के निर्णय लेने के फैसले के अधिकार को लेकर अखबार में एक आलेख लिखे।

बासित ने कहा कि, आखिरकार मुझे महिला पत्रकार शोभा डे मिलीं, जो काफी प्रख्यात हैं। वह एक आलेख लिख रही थीं। बासित ने दावा किया कि, मैं उनसे मिला और उनको समझाया। उन्होंने आलेख के आखिर में लिखा कि अब समय आ गया है कि जनमत संग्रह के माध्यम से कश्मीर मसले का हमेशा के लिए समाधान किया जाए।

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