कर्नाटक: कोचिंग चलाने वाले युवा से हारे BJP के दिग्गज मंत्री के सुधाकर, कौन हैं प्रदीप ईश्वर?
karnataka election results, कभी प्रदीप के. सुधाकर के सहयोगी प्रदीप ईश्वर ने उन्हे अपने पहले चुनाव में ही पटखनी दी है।

कर्नाटक में कांग्रेस ने शानदार वापसी करते हुए 135 सीटें पर जीत हासिल की है। वहीं बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है। बीजेपी के दिग्ग्ज नेता और स्वास्थ्य मंत्री के. सुधाकर चुनाव हार गए हैं। उन्हें एक कोचिंग चलाने वाले युवा ने मात दी है।
कांग्रेस ने 38 साल के एक कोचिंग सेंटर चलाने वाले प्रदीप ईश्वर को टिकट दिया था। बता दें कि कभी प्रदीप के. सुधाकर के सहयोगी हुआ करते थे। बिना माता-पिता के प्रदीप राज्य के सबसे युवा एमएलए चुने गए हैं। सुधाकर चिक्काबल्लापुर सीट से ईश्वर से 10,642 मतों से हार गए।
ईश्वर परिश्रम एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड नाम का एक कोचिंग सेंटर चलाते हैं। जो चिकित्सा और अन्य प्रतियोगी पाठ्यक्रमों में प्रवेश परीक्षाओं के लिए कोचिंग प्रदान करता है। जिसे उन्होंने कभी के. सुधाकर की मदद से खोला था। ईश्वर की पत्नी इसी संस्थान में शिक्षिका हैं।

चुनावों के दौरान प्रदीप ईश्वर ने अपने उग्र भाषणों से लोकप्रियता हासिल कर ली थी। जिससे वह सोशल मीडिया पर सनसनी बन गए। एक ऐसा ही भाषण उनका वायरल हुआ था। जिसमें वे खुद को अनाथ, 12 वीं पास बताते हुए खुद की एक मेडिकल डॉक्टर से तुलना करते दिखे थे। उनके भाषण का एक हिस्सा...देखते हैं कि डॉक्टर जीतता है या डॉक्टरों का शिक्षक काफी वायरल हुआ था।
प्रदीप ईश्वर पहली बार 2016 में एक विरोध प्रदर्शन के चलते सुर्खियों में आए थे। जिसमें मांग की गई थी कि सरकार बेंगलुरु के बाहरी इलाके देवनहल्ली में विजीपुरा को एक तालुक घोषित करे। लेकिन वे इसमें असफल रहे। इसके बाद वे के सुधाकर के खिलाफ यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करने लगे। जो धीरे-धीरे वायरल हो गए। 2018 में ईश्वर ने कथित पुलिस लाठीचार्ज में एक युवा कांग्रेसी कार्यकर्ता की मौत का मामला उठाया था। जिसके कारण उनकी गिरफ्तारी हुई। इससे उनकी लोकप्रियता में इजाफा हुआ।

ओबीसी बलिजा समुदाय से आने वाले प्रदीप जल्द ही अपने इलाके में प्रसिद्ध हो गए। उन्हें केवी नवीन किरण का समर्थन मिल गया। जिन्होंने सुधाकर के खिलाफ 2018 का चुनाव निर्दलीय लड़ा था, लेकिन वे हार गए थे। हालांकि बाद में नवीन बीजेपी में चले गए। कांग्रेस को चिक्काबल्लापुर सीट पर एक ऐसा चेहरा चाहिए था, जो सुधाकर के खिलाफ लड़ सके। कांग्रेस की खोज प्रदीप पर आकर खत्म हुई।
कांग्रेस ने प्रदीप ईश्वर को के सुधाकर के खिलाफ उतारा। ईश्वर का मुकाबला एक ऐसे पैसे वाले नेता और मंत्री से था। जिनके कैंपेन में एक्टर सुदीप किच्चा और तेलुगु हास्य अभिनेता ब्रह्मानंदम तक शामिल हुए थे। लेकिन घर घर जाकर प्रचार करने और मजबूत सोशल मीडिया कैंपेन ने उन्हें जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
चुनाव जीतने के बाद प्रदीप ने कहा कि, कांग्रेस पार्टी का दक्षिण भारत में विशेष रूप से कर्नाटक में एक मजबूत आधार है। एक गरीब परिवार से आने वाले अनाथ बच्चा होने के कारण कांग्रेस पार्टी ने मुझे टिकट की पेशकश की। बिना पैसे के ही मैं चुनाव जीत गया। इससे पता चलता है कि लोकतंत्र अभी भी जीवित है। मैं कांग्रेस पार्टी को धन्यवाद देना चाहता हूं।












Click it and Unblock the Notifications