आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर- प्रोफाइलिंग में जुटी सीएम जगन मोहन बिग्रेड
आंध्र प्रदेश में 2024 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इस चुनाव से पहले मतदाता प्रोफाइलिंग और जमीनी स्तर पर सरकार द्वारा नियुक्त 'स्वयंसेवकों' की भूमिका को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। विपक्षी दलों के अलावा अधिकारी स्तर पर राज्य की मतदाता सूची में हेरफेर होने का संदेह जताया गया है। हालांकि ये भले ही विवादास्पद है लेकिन सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी के लिए ये फायदेमंद हो सकता है।

बता दें जगन मोहन रेड्डी की 13 साल पुरानी पार्टी 10 लाख कार्यकर्ताओं की राज्य में एक बिग्रेड तैयार कर ली है। जिसमें पार्टी कैडर के अलावा सरकारी मशीनरी भी शामिल हैं जिससे पार्टी को राज्य में नियंत्रण और एक स्तर मिलता है। जिसे विपक्षी दलों, कार्यकर्ताओं द्वारा लोकतंत्र में चुनावी राजनीति में सही नहीं माना जाता है।
समाज के नागरिक, बुद्धिजीवी और सेवानिवृत्त नौकरशाह सभी व्यक्तिगत डेटा संग्रह और मतदाता प्रोफाइलिंग की चिंता व्यक्त करते हैं, इसे निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन मानते हैं।
गौरतलब है कि 25 दिसंबर तक राज्य सरकार के पोर्टल के अनुसार लगभग 2.56 लाख गांव और वार्ड स्वयंसेवक, 1.34 लाख सचिवालय कर्मचारी और 5.2 लाख गृह सारथी, साथ ही वाईएसआरसीपी के 45,000 प्रभारी आंध्र प्रदेश में सक्रिय हैं।
आदर्श तौर पर इन सभी को विभिन्न स्तरों पर काम करना चाहिए, लेकिन उनका उद्देश्य केवल वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यों का प्रचार करना और बदले में पार्टी को सत्ता बनाए रखने में करना ही दिख रहा है।
कुल मिलाकर, लगभग 10 लाख कार्यकर्ताओं की जगन मोहन बिग्रेड आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और वाईएसआरसीपी प्रमुख जगन मोहन रेड्डी को अंततः रिपोर्ट करती है।












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