Ramalinga Reddy इस्तीफे के बाद डैमेज कंट्रोल में जुटे CM शिवकुमार, बोले- वो मेरे करीबी दोस्त, सब ठीक कर देंगे

CM DK Shivakumar Reacts Ramalinga Reddy: कर्नाटक कैबिनेट में विभागों के बंटवारे को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी (Ramalinga Reddy) के अचानक इस्तीफे से उपजे सियासी संकट को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) खुद मोर्चे पर आ गए हैं।

मंत्री पद छोड़ने के रेड्डी के एलान के कुछ ही घंटों बाद, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिशें शुरू कर दी हैं और रेड्डी को मनाने में जुट गए हैं।

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CM शिवकुमार ने इस स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताते हुए आश्वासन दिया है कि रामलिंगा रेड्डी उनके बेहद पुराने और करीबी सहयोगी हैं और वे आपस में बैठकर इस पूरे मसले को बहुत जल्द सुलझा लेंगे।

'वह गांवों में जाकर काम नहीं करना चाहते'-CM शिवकुमार

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मीडिया से बातचीत करते हुए रामलिंगा रेड्डी के साथ अपने संबंधों और उनके बीच हुई बातचीत का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कैबिनेट में किसी भी तरह की कोई चिंता की बात नहीं है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा-चिंता की कोई बात नहीं है। रामलिंगा रेड्डी मेरे बहुत अच्छे और पुराने मित्र हैं। अगर कैबिनेट में देखा जाए, तो हम दोनों एक-दूसरे के सबसे करीबी दोस्त हैं। हम इस समस्या को आपस में सुलझा लेंगे। रामलिंगा रेड्डी हमारे वरिष्ठ नेता और सहकर्मी हैं। उन्होंने मुझसे कहा था कि वह गांवों में जाकर काम नहीं कर सकते, इसलिए उन्हें कोई दूसरा मंत्रालय चाहिए। मैं खुद उनसे बात करूंगा और सब कुछ ठीक कर दूंगा।

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मैं 53 साल से कांग्रेसी हूं, लेकिन इस अपमान को कब तक सहूं? - रेड्डी

इससे पहले, शुक्रवार को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रामलिंगा रेड्डी ने मुख्यमंत्री शिवकुमार द्वारा गुरुवार को किए गए विभागों के आवंटन पर गहरा असंतोष और नाराजगी जताई थी। रेड्डी बेंगलुरु शहर के विकास से जुड़ा 'बेंगलुरु विकास' पोर्टफोलियो चाहते थे, लेकिन उन्हें 'प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई परियोजना' मंत्रालय सौंप दिया गया। रेड्डी ने दो टूक कहा कि वह अपनी अंतरात्मा के खिलाफ जाकर काम नहीं कर सकते। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का हवाला देते हुए कहा-मैं अभी भी कांग्रेस पार्टी में हूं और मैंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। मैं पिछले 53 सालों से कांग्रेस का वफादार सिपाही रहा हूं और इस दौरान मैंने पार्टी के भीतर कई बड़ी जिम्मेदारियों को संभाला है।

रेड्डी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, मैंने कभी भी मंत्री पद के लिए लॉबिंग या पैरवी नहीं की। मैं पूर्व मुख्यमंत्री एम. वीरप्पा मोइली और एस.एम. कृष्णा जैसे दिग्गजों के मंत्रिमंडलों में भी मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुका हूं। अब मेरे सामने इसके अलावा और क्या विकल्प बचा था? मैं इस तरह के अपमान को और कब तक बर्दाश्त कर सकता हूं?" रेड्डी ने साफ किया कि वह मंत्री पद भले ही छोड़ रहे हैं, लेकिन वह कांग्रेस के विधायक (MLA) बने रहेंगे।

शिवकुमार ने अपने पास रखे हैं सबसे महत्वपूर्ण विभाग

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपनी कैबिनेट के 13 मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा तो कर दिया है, लेकिन सरकार और प्रशासन की असली चाबी उन्होंने अपने हाथों में ही सुरक्षित रखी है। मुख्यमंत्री ने कई सबसे महत्वपूर्ण और रसूखदार विभाग किसी अन्य मंत्री को देने के बजाय अपने पास ही रखे हैं, जिनमें वित्त मंत्रालय, कैबिनेट मामले, कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग (DPAR), इंटेलिजेंस (खुफिया विभाग) और अन्य सभी गैर-आवंटित पोर्टफोलियो रखा है।

अब पूरी राज्य इकाई और आलाकमान की नजरें मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और रामलिंगा रेड्डी की होने वाली मुलाकात पर टिकी हैं, जिससे यह साफ होगा कि रेड्डी का इस्तीफा मंजूर होता है या उनके मनमुताबिक विभाग बदलकर उन्हें कैबिनेट में बनाए रखा जाता है।

सरकार के सामने पहली बड़ी चुनौती

कांग्रेस ने हाल ही में कर्नाटक में सत्ता संभाली है और डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार अभी शुरुआती दौर में है। ऐसे में कैबिनेट गठन के तुरंत बाद एक वरिष्ठ नेता का इस्तीफा सरकार के लिए राजनीतिक असहजता पैदा कर सकता है। हालांकि मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व इस विवाद को जल्द सुलझाने की कोशिश में जुटे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या रामलिंगा रेड्डी को मनाया जा सकेगा या फिर सरकार को अपने पहले बड़े आंतरिक संकट का सामना करना पड़ेगा।

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