'सड़क पर उतरिए, नहीं तो अगले साल फिर होगा वही खेल,अब और नहीं सहेंगे!' परीक्षा विवाद पर केजरीवाल की हुंकार
AAP leader Arvind Kejriwal: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार उठ रहे सवाल अब सियासी बहस से आगे बढ़कर जनआंदोलन का रूप लेते दिख रहे हैं। नीट और सीबीएसई परीक्षा से जुड़े विवादों के बीच आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने छात्रों और अभिभावकों से खुलकर सड़क पर उतरने की अपील की है। उनका कहना है कि जब तक आम लोग दबाव नहीं बनाएंगे, तब तक पेपर लीक और परीक्षा गड़बड़ियों का सिलसिला रुकने वाला नहीं है।
केजरीवाल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब छह जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा विवादों को लेकर एक बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी चल रही है। इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग बताया जा रहा है।

परीक्षा विवाद पर केजरीवाल का बड़ा हमला
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में केजरीवाल ने कहा कि पेपर लीक अब सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है और जब तक जनता सख्त प्रतिक्रिया नहीं देगी, तब तक स्थिति नहीं बदलेगी।
उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों से एकजुट होकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करने की अपील की। उनके अनुसार यह मुद्दा सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य का सवाल है।
केजरीवाल बोले,
''पेपर लीक अरबों खरबों का धंधा है। इस धंधे में बहुत बड़े-बड़े लोग शामिल हैं। जब तक आप सब लोग सड़कों पे उतर के सरकार को मजबूर नहीं करोगे, ये धंधा बंद नहीं होगा। अगले साल ऐसे ही सारे पेपरों में फिर से गड़बड़ होगी। अपने बच्चों के भविष्य के लिए, अपने परिवार के भविष्य के लिए, देश के भविष्य के लिए - सब इकट्ठे हो जाओ और माँग करो - बस, अब और नहीं सहेंगे।''
आखिर क्यों बढ़ा है परीक्षा व्यवस्था पर विवाद?
पिछले कुछ समय से देश में विभिन्न परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब नीट यूजी 2026 परीक्षा को आयोजित किए जाने के कुछ दिनों बाद रद्द कर दिया गया। इस फैसले ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को असमंजस में डाल दिया।
इसके बाद सीबीएसई कक्षा 12 के परिणामों को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। मूल्यांकन प्रक्रिया, उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल से जुड़ी शिकायतों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ा दीं। इन घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
6 जून के प्रदर्शन का एजेंडा क्या है?
इसी पृष्ठभूमि में 06 जून को कॉकरोच जनता पार्टी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा की गई है। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर दबाव बनाना बताया जा रहा है। आयोजकों का दावा है कि यह आंदोलन सिर्फ किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भर्ती और शिक्षा तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग को लेकर है।
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इस आंदोलन के प्रति समर्थन जताया है। उन्होंने संकेत दिया है कि यदि पांच जून तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वह भी छह जून के प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। उनके समर्थन के बाद इस विरोध कार्यक्रम को और अधिक चर्चा मिल रही है।
क्या परीक्षा सुधार अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है?
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों ने इस मुद्दे को सिर्फ शैक्षणिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना दिया है। लाखों छात्र हर साल प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लेते हैं और ऐसे में किसी भी तरह की अनियमितता सीधे उनके भविष्य को प्रभावित करती है।
यही वजह है कि अब विपक्षी दल सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं, जबकि छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता भी जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन आरोपों और मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या परीक्षा सुधार को लेकर कोई बड़ा फैसला सामने आता है।












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