आज भुवनेश्वर में शुरू होगा कोविड-19 वैक्सीन Covaxin का ह्यूमन ट्रायल
नई दिल्ली। दुनिया भर में अब कोरोनो वायरस के लिए एक वैक्सीन बनाने की कोशिश की जा रही है। भारत में भी कई जगहों पर स्वदेशी निर्मित कोरोना वैक्सीन के ट्रायल चल रहे हैं। हैदराबाद की भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरलॉजी के साथ मिलकर यह वैक्सीन बनाई है। जिसका नाम कोवाक्सीन है। कोवाक्सीन का इंसानों पर प्रायोगिक परीक्षण आज से भुवनेश्वर के एक संस्थान में शुरू होगा। आईसीएमआर ने पहले और दूसरे चरण के प्रायोगिक परीक्षण के लिए देश में 12 केंद्रों को चुना है और यह संस्थान भी उनमें से एक है।

भुवनेश्वर में ट्रायल आज से शुरू
इसे ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) द्वारा फर्स्ट और सेकेंड फेज क्लिनिकल ह्यूमन ट्रायल के लिए पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। आईएमएस और एसयूएम अस्पताल, भुवनेश्वर के डीन प्रोफेसर जी साहू ने बताया कि 22 जुलाई से शुरू होने वाले ह्यूमन ट्रायल के फर्स्ट फेज के लिए 30-40 उम्मीदवारों को चुना जाएगा। प्रोफेसर जी साहू ने कहा कि वॉलेंटियर की भर्ती और स्क्रीनिंग शुरू हो चुकी है। स्क्रीनिंग के बाद हम ट्रायल के पहले फेज के लिए 18-55 वर्ष की आयु के बीच स्वस्थ व्यक्तियों का चयन करेंगे। हम बुधवार को कोविड-19 वैक्सीन के ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल के फर्स्ट फेज की शुरुआत करेंगे।
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मानव परीक्षण की मिल चुकी है अनुमति
उन्होंने कहा, हम उन उम्मीदवारों की निगरानी करेंगे और वे हमारे साथ लगातार संपर्क में रहेंगे। हम टीकाकरण के बाद उनके रक्त में एंटीबॉडी स्तर का परीक्षण करने के लिए भी उन्हें यहां बुलाएंगे यदि यह सफल रहा तो हम दूसरे और फिर जाएंगे तीसरे चरण में आगे बढ़ेंगे। डीन ने यह भी कहा कि जब तक एक वैक्सीन नहीं मिल जाती है और आसानी से उपलब्ध नहीं हो जाती है, तब तक देश में मामलों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए कोरोना वायरस के लिए सभी सावधानियां बरती जानी चाहिए।

कोवाक्सीन एक 'इनऐक्टिवेटेड' वैक्सीन है
कोवाक्सीन एक 'इनऐक्टिवेटेड' वैक्सीन है। यह उन कोरोना वायरस के पार्टिकल्स से बनी है जिन्हें मार दिया गया था ताकि वे इन्फेक्ट न कर पाएं। इसकी डोज से शरीर में वायरस के खिलाफ ऐंटीबॉडीज बनती हैं। कोवाक्सीन के अलावा जायडस कैडिला की ZyCoV-D को भी फेज 1 और फेज 2 ट्रायल के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से मंजूरी मिल चुकी है। ट्रायल के पहले फेज में जायडस कैडिला 1,000 पार्टिसिपेंट्स को डोज देगी। डीएनए पर आधारित ZyCoV-D अहमदाबाद के वैक्सीन टेक्नोलॉजी सेंटर में डेवलप की गई है।












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