सुप्रीम कोर्ट से 'वंतारा' को मिली बड़ी राहत, जानवरों के ट्रांसफर विवाद पर आया SC का फैसला
गुजरात में रिलायंस का एक एनिमल रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर है, जिसका नाम है वनतारा। लेकिन हाल ही में यह सेंटर एक बड़े विवाद में घिर गया था, जहां आरोप लगाए गए थे कि यहां हाथियों और अन्य जानवरों का ट्रांसफर अवैध तरीके से किया गया है। मामला इतना बड़ा था कि सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अब कोर्ट ने इस मामले पर एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस के पशु बचाव और पुनर्वास केंद्र, वनतारा में हाथियों के ट्रांसफर में कोई भी अनियमितता नहीं पाई गई है।

SIT ने क्या कहा?
एसआईटी ने कहा कि वनतारा में बचाए गए जानवरों को एक लंबी और सख्त कानूनी प्रक्रिया के बाद ही लाया गया है। इन सभी जानवरों को सेंटर में रखने से पहले जरूरी परमिट और पूरी अनुमति ली गई थी।
अदालत का रुख
जस्टिस पंकज मिथल और प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने कहा कि, 'भारत में कुछ ऐसी चीजें हैं जिन पर हमें गर्व है और हमें अनावश्यक रूप से हर चीज के लिए हंगामा नहीं करना चाहिए।' अदालत ने यह भी नोट किया कि वनतारा के खिलाफ बार-बार जांच हुई, लेकिन हर बार यह पाया गया कि उन्होंने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है।
आरोपों को खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जानवरों की तस्करी या 'लॉन्डरिंग' के सभी आरोप निराधार हैं। कोर्ट ने कहा कि वनतारा में जानवरों को वैध परमिट के बाद ही लाया गया है और किसी को भी इन आधिकारिक परमिटों पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।
क्या जानवरों की देखभाल वाकई अच्छी है?
SIT ने अपनी रिपोर्ट में जानवरों की देखभाल के मानकों पर भी बात की। एक्टपर्ट्स की राय लेने के बाद SIT ने पाया कि वनतारा में सुविधाएं निर्धारित मानदंडों से कहीं बेहतर हैं। कोर्ट ने कहा कि, 'पूरे रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद, हम संतुष्ट हैं कि वनतारा में सुविधाएं पशुपालन, पशु चिकित्सा और कल्याण के साथ-साथ केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा निर्धारित वैधानिक मानदंडों से भी बेहतर हैं।'
इस फैसले के बाद, टीम वनतारा ने SIT के निष्कर्षों का स्वागत किया। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि यह फैसला उन सभी आरोपों को निराधार साबित करता है, जो उनके पशु कल्याण मिशन के खिलाफ लगाए गए थे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले के बाद, वनतारा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले लोग और संगठन क्या कदम उठाते हैं। क्या इस मामले से जुड़ी और भी कोई जानकारी सामने आएगी?












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