CJI जस्टिस यूयू ललित से सरकार ने मांगा उत्तराधिकारी, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की क्यों रहेगी दावेदारी ? जानिए
CJI जस्टिस यूयू ललित को केंद्र सरकार को अपने उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश भेजनी है। जस्टिस ललिल अगले महीने रिटायर हो रहे हैं और प्रावधानों के तहत केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने भारत के प्रधान न्यायाधीश से उन्हें अपने उत्तराधिकारी के नाम का सुझाव मांगा है। इसके बाद ही प्रधानमंत्री अगले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के नाम की सलाह राष्ट्रपति को नियुक्ति के लिए देंगे। जानिए, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया चुनने की प्रक्रिया क्या है और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की इस पद के लिए दावेदारी मजबूत क्यों मानी जा रही है।

कानून मंत्रालय ने सीजेआई से मांगा अगले प्रधान न्यायाधीश का नाम
भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित से केंद्र सरकार ने अपने उत्तराधिकारी यानि भारत के अगले प्रधान न्यायाधीश का नाम देने को कहा है। जस्टिस ललित का कार्यकाल 8 नवंबर को खत्म हो रहा है। सीजेआई जस्टिस यूयू ललित के दफ्तर में शुक्रवार को केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू की तरफ से अगले प्रधान न्यायाधीश के लिए नाम का सुझाव देने को कहा गया है। कानून और न्याय मंत्रालय के ट्विटर हैंडल पर जानकारी दी गई है कि 'भारत के प्रधान न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियक्ति के मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (एमओपी) के तहत, आज कानून और न्याय मंत्री ने भारत के प्रधान न्यायाधीश को उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए सिफारिश भेजने के लिए एक चिट्ठी भेजी है।'

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ बन सकते हैं 50वें सीजेआई
जस्टिस ललित ने देश के 49वें प्रधान न्यायाधीश के तौर पर इसी साल 27 अगस्त को शपथ लिया था और महज 74 दिनों का कार्यकाल पूरा करके 8 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं। जो परंपरा रही है उसके मुताबिक वर्तमान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज के नाम की सिफारिश अपने उत्तराधिकारी के तौर पर करते हैं। वरिष्ठता के मानदंड मुताबिक जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ देश के 50वें सीजेआई बनने की कतार में हैं।

सीजेआई से सिफारिश मिलने के बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को भेजेंगे नाम
उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति के लिए जो मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (एमओपी) है, उसके तहत कानून मंत्रालय से संदेश प्राप्त करने के बाद मौजूदा प्रधान न्यायाधीश अपने उत्तराधिकारी के नाम तय करने की प्रक्रिया शुरू करते हैं। कानून मंत्री को एक उचित समय पर सीजेआई से उनकी ओर से भेजी गई सिफारिश मिल जाती है, लेकिन एमओपी में इसकी समय सीमा के बारे में ज्यादा स्पष्ट जानकारी नहीं है। एमओपी सिर्फ ये कहता है कि, 'चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से सिफारिश प्राप्त होने के बाद केंद्रीय कानून एवं न्याय मामलों के मंत्री उस सिफारिश को प्रधानमंत्री के सामने रखते हैं, जो राष्ट्रपति को नियुक्ति के मामले में सलाह देंगे।'

पूर्व सीजेआई के बेटे हैं जस्टिस चंद्रचूड़
सीजेआई यूयू ललित के बाद सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ देश के 16वें प्रधान न्यायाधीश जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ के बेटे हैं। सीजेआई के तौर पर जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ का कार्यकाल देश में सबसे लंबा है। हालांकि, यदि जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति देश के अगले सीजेआई के तौर पर होती है तो वे करीब दो साल तक भारत के प्रधान न्यायाधीश के पद पर रहेंगे। यानि मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार का बाकी बचा कार्यकाल लगभग उन्हीं के कार्यकाल में पूरा होगा।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं जस्टिस चंद्रचूड़
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को 1998 में बॉम्बे हाई कोर्ट में वरिष्ठ वकील का दर्जा मिला और 1998 से लेकर 2000 तक उन्होंने भारत के एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल के तौर पर काम किया। 29 मार्च, 2000 को उन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट में एडिश्नल जज नियुक्त किया गया और 31 अक्टूबर, 2013 को उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली। 13 मई, 2016 को इन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया। ये बॉम्बे हाई कोर्ट के अलावा सुप्रीम कोर्ट में भी वकील के रूप में प्रैक्टिस कर चुके हैं।

सेंट स्टीफेंस कॉलेज के छात्र रहे हैं जस्टिस चंद्रचूड़
जज बनने से पहले जस्टिस चंद्रचूड़ देश-विदेश में लॉ के विद्यार्थियों को विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर शिक्षित भी कर चुके हैं। इन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ऑनर्स और दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की है। इसके अलावा अमेरिका के हार्वर्ड लॉ स्कूल से भी डॉक्टरेट किया है।












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