'शाहरुख खान चाहते थे राम मंदिर की नींव मुसलमान,मस्जिद की नींव रखे हिंदू',चीफ जस्टिस के विदाई समारोह में खुलासा

'शाहरुख खान चाहते थे राम मंदिर की नींव मुसलमान, मस्जिद की नींव रखे हिंदू', चीफ जस्टिस के विदाई समारोह में खुलासा

नई दिल्ली, 24 अप्रैल: बॉलीवुड के सुपरस्टार अभिनेता शाहरुख खान चाहते थे कि अयोध्या भूमि विवाद मामले में निपटारे के बाद राम मंदिर की नींव मुसलमान रखते और मस्जिद की नींव हिंदू रखते। इस बात का खुलासा शुक्रवार (23 अप्रैल) को सुप्रीम कोर्ट के निवर्तमान चीफ जस्टिस एसए बोबडे के विदाई समारोह में हुआ। विदाई समारोह में ये भी खुलासा हुआ है कि भारत के निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे चाहते थे कि बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान अयोध्या भूमि विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता प्रक्रिया का हिस्सा बनें। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने ने प्रधान न्यायाधीश के विदाई समारोह के मौके पर अपने संबोधन में इस पूरे बात का खुलासा किया। अयोध्या भूमि विवाद के लिए मध्यस्थता समिति का गठन मार्च 2019 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की बेंच ने किया था।

Shahrukh Khan

वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह अयोध्या भूमि विवाद को सुलझाने के मामले में एसए बोबडे के प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि शाहरुख खान मध्यस्थ के लिए सहमत भी हो गए थे लेकिन लेकिन यह प्रक्रिया सामने नहीं आ सकी।

शाहरुख ने कहा था- मंदिर की नींव मुसलमान और मस्जिद की नींव हिंदुओं द्वारा रखी जाए

वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा, ''जब जस्टिस एसए बोबडे अयोध्या सुनवाई के प्रारंभिक चरण में थे, तो उनका मानना था कि मध्यस्थता से समस्या का समाधान किया जा सकता है। अयोध्या विवाद के मुद्दे पर पर मैं आज एसए बोबडे और अपने बीच के एक सीक्रेट जाहिर करना चाहता हूं। जब एसए बोबडे अयोध्या सुनवाई के प्रारंभिक चरण में थे तो उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या शाहरुख खान मध्यस्थता समिति का हिस्सा हो सकते हैं। उसने मुझसे इसलिए पूछा क्योंकि वह (बोबडे) जानते थे कि मैं खान (शाहरुख खान) के परिवार को जानता हूं। मैंने खान के साथ इस मामले पर चर्चा की और वह इसके लिए तैयार भी हो गए थे। शाहरुख खान ने यहां तक कहा कि मंदिर की नींव मुसलमानों द्वारा रखी जाए और मस्जिद की नींव हिंदुओं द्वारा रखी जाए। लेकिन मध्यस्थता प्रक्रिया विफल हो गई और इसलिए इस योजना को भी हमने छोड़ दिया। लेकिन मध्यस्थता के जरिए सांप्रदायिक तनाव को हल करने की उनकी (बोबडे) इच्छा उल्लेखनीय थी।''

बता दें कि बोबडे को नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के 47वें प्रधान न्यायाधीश बने थे। 23 अप्रैल 2021 को एसए बोबडे सेवानिवृत्त हो गए हैं। एसए बोबडे ने अपने कार्यकाल में अयोध्या जन्मभूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला किया था।

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