आजादी के 75 साल बाद भी SC में केवल 11% महिला प्रतिनिधित्व: CJI एनवी रमना
नई दिल्ली, 04 सितंबर: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को तीन महिला न्यायाधीशों ने शपथ ली थी, जिसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या कुल चार हो गई हैं। ऐसे इतिहास में पहली बार हुआ है। वहीं अब CJI एनवी रमना ने महिला जजों की संख्या पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी SC में केवल 11% महिला प्रतिनिधित्व है।

भारत के चीफ जस्टिस (CJI) एनवी रमना ने कहा कि अधिकांश महिलाएं पेशे में संघर्ष की वकालत करती हैं, बहुत कम महिलाओं को शीर्ष पर प्रतिनिधित्व मिलता है। आजादी के 75 साल बाद सभी स्तरों पर कम से कम 50% महिलाओं के प्रतिनिधित्व की उम्मीद होगी, लेकिन हम सुप्रीम कोर्ट की बेंच में केवल 11% ही हासिल कर पाए हैं। वहीं चीफ जस्टिस ने कहा कि आम लोग कॉरपोरेट कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण कानूनी सलाह नहीं दे सकते, जो चिंता का विषय है। भले ही हम दृढ़ता से न्याय तक पहुंच प्रदान कर रहे हैं, लेकिन भारत में लाखों लोग अदालतों का दरवाजा खटखटाने में असमर्थ हैं।
सीजेआई एनवी रमना ने कहा किमैं (कानूनी) पेशे में एक नई प्रवृत्ति को उजागर करना चाहता हूं। मैं पेशे के निगमीकरण की बात कर रहा हूं, क्योंकि आजीविका से संबंधित मुद्दों के कारण कई युवा और उज्ज्वल वकील कानून फर्मों में शामिल हो रहे हैं। यह पारंपरिक प्रथा में भी गिरावट का कारण बन रहा है।
कानून मंत्री को पेश करेंगे रिपोर्ट
उन्होंने कहा कि मैंने एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें देश के कोने-कोने से जानकारी इकट्ठा की गई है, जिसमें यह बताया गया है कि हमें बार और महिला वकीलों को कितने न्यायालय भवन, कक्ष और सुविधाएं प्रदान करनी हैं। एक हफ्ते बाद मैं इसे कानून मंत्री के सामने पेश करूंगा।
'महिलाओं के लिए शौचालय तक नहीं'
इसी के साथ ही उन्होंने बताया कि न्यायिक प्रणाली में बुनियादी ढांचे की कमी, प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी और न्यायाधीशों की भारी रिक्तियों जैसी कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारत को नेशनल ज्यूडिशियल इंफ्राटक्चर कॉरेपोरेशन की आवश्यकता है। सीजेआई ने कहा कि मैं अपने हाई कोर्ट के दिनों में देखा कि महिलाओं के लिए शौचालय तक नहीं है।












Click it and Unblock the Notifications