यूपी निकाय चुनाव: महिलाएं बनेंगी जनप्रतिनिधि, पति करेंगे राज
मेरठ नगर निकाय चुनाव में जिन महिला प्रत्याशियों ने इन चुनावों में नामांकन किया है उनमें से अधिकतर ने हाल में ही सियासत में एंट्री ली है जबकि कई ऐसी भी हैं जिनकी शैक्षिक योग्यता काफी कम है।
नई दिल्ली। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर हमेशा बात होती है लेकिन कई बार ऐसा होता है कि महिलाएं जनप्रतिनिधि तो बन जाती है लेकिन असली काम उनके पति करते हैं। महिलाओं का बस नाम कागजो में चलता है और सत्ता उनके पति चलाते हैं। मेरठ नगर निकाय चुनाव में नामांकन दाखिल होने का बाद साफ हो गया है कि महापौर और चेयरमैन के पद पर चुनाव लड़ने वाली तमाम महिला प्रत्याशी विजयी होने के बाद अपने पति के सहारे ही सियासत करेंगी। महिलाओं को जनता निर्वाचित तो करेगी लेकिन जनप्रतिनिधि का काम उनके पति ही करेंगे।

मेरठ नगर निकाय चुनाव में जिन महिला प्रत्याशियों ने इन चुनावों में नामांकन किया है उनमें से अधिकतर ने हाल में ही सियासत में एंट्री ली है जबकि कई ऐसी भी हैं जिनकी शैक्षिक योग्यता काफी कम है। इस बार भी निकाय चुनाव में ऐसी ही तस्वीर बन रही है। मेरठ नगर निगम की मेयर सीट के लिए आठ प्रत्याशी मैदान में हैं। नामांकन करने वाले इन प्रत्याशियों में दो महिलाएं ग्रेजुएट हैं जबकि 3 अन्य प्रत्याशी निरक्षर हैं।
मेरठ जिले की हर्रा-खिवाई नगर पंचायत महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। यहां से 28 महिलाओं ने नामांकन किया है जिनमें ज्यादातर महिलाएं मुस्लिम हैं। इन 28 में से केवल दो महिलाएं हाईस्कूल पास हैं। इसके अलावा तीन ने खुद को पांचवी पास और बाकी ने निरक्षर बताया है।












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