चुनावी किस्सा: जब जनसभा में शोर मचा रहे चमगादड़ों को नेहरू जी ने डांटा, लोग करने लगे ऐसा-ऐसा दावा
1952 Lok Sabha Election Chunavi Kisse: नेताओं को चुनावी सभाओं में जनता या फिर नारेबाजी करने वाले लोगों पर गुस्सा करते हुए देखना आम बात है, लेकिन एक बार ऐसा भी हुआ है, जब भरी गर्मी में चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे पंडित जवाहर लाल नेहरू को चमगादड़ों ने परेशान कर दिया और फिर उसी मंच से उन्होंने कुछ ऐसा किया, जो आज भी चर्चा का विषय है।
चुनावी किस्सों में आज बात होगी उसी टॉपिक पर, जब उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में रैली करने पहुंचे पंडित नेहरू ने चमगादड़ों को ऐसा डांटा की, उसके बाद उनकी आवाज नहीं निकली और यही बात आज तक चर्चाओं में रहती है।

देश के पहले चुनाव की घटना
जनसभा की यह घटना देश के पहले लोकसभा चुनाव 1952 की है। दरअसल, देश में पहले आम चुनावों का ऐलान हो गया था, जिसके बाद पंडित नेहरू फतेहपुर के खागा में रैली करने पहुंचे थे। जहां नेहरू जी की सभा थी, वो पक्का तालाब था और वहां इमली के बड़े-बड़े पेड़ पर चमगादड़ों की फौज लटकी थी।
चमगादड़ों ने किया नेहरू जी को परेशान
ऐसे में लोगों की भीड़ देखकर चमगादड़ असहज हो गए और शोर मचाते हुए तेज आवाज निकालने लगे। हालांकि शोर के बीच कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भाषण दिया और अपनी सीट पर जाकर बैठ गए। इसके बाद नेहरू जी भाषण देने आएं।
गुस्से में जानिए क्या बोले?
भीषण गर्मी के मौसम में पंडित नेहरू परेशान हो रहे थे। वो बार-बार अपनी पसीना पोंछते देखे जा रहे थे। ऐसे में जैसे ही वो माइक के पास पहुंचे और बोलने लगे तो फिर से चमगादड़ों का शोर शुरू हो गया। जिसके बाद उनकी तरफ देखते हुए नेहरू भी चिल्लाएं और बोला-प्लीज कीप साइलेंस...मैं बहुत दूर से अपनी बात कहने आया हूं, पहले मैं अपनी बात कह लूं, फिर आपकी बात सुनकर ही जाऊंगा"
इसके बाद सभा में मौजूद लोग हंसने लगे, लेकिन संयोग ऐसा बना कि सभी चमगादड़ चुप हो गए और नेहरू ने अपना भाषण पूरा किया। इस घटना के बाद लोगों ने यहां तक कहा कि पंडितजी जीव-जंतु से भी बात कर सकते हैं। इस किस्से का आज भी वहां के पुराने लोग चुनावों के वक्त जरूर याद करते हैं।












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