20 से ज्यादा चाइनीज जेट ने लद्दाख से सटे क्षेत्र में किया अभ्यास, तैयार थी भारतीय वायुसेना
नई दिल्ली, 8 जून। चीन की वायु सेना ने हाल ही पूर्वी लद्दाख के तनाव वाले क्षेत्र में अपने एयर बेस से एक बड़ा हवाई अभ्यास किया है। इस हवाई अभ्यास पर भारत ने करीब से नजर बनाए रखी है। पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में पिछले एक साल से अधिक समय से दोनों देशों में भारी तनाव चल रहा है और दोनों की सेनाएं क्षेत्र में डटी हुई हैं।

सैन्य सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया है कि लगभग 21-22 चीनी लड़ाकू विमानों ने पूर्वी लद्दाख में भारतीय क्षेत्र के दूसरी तरफ अभ्यास किया है। इन विमानों में मुख्य रूप से जे-11 और कुछ जे-16 लड़ाकू विमान शामिल थे। हाल ही में हुए इस सैन्य अभ्यास ने भारत ने करीब से नजर बनाए रखी थी।
अपनी सीमा में रहे चीनी जेट
चीनी लड़ाकू विमानों ने होटन, गार गुंसा और काशगर हवाई क्षेत्रों समेत इसके ठिकानों से गतिविधियां संचालित की। इन हवाई अड्डों को हाल ही में उन्नत किया गया है ताकि सभी प्रकार के लड़ाकू विमानों का संचालन किया जा सके। इन एयरबेस के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर मौजूद लड़ाकू विमानों की संख्या को छिपाया भी जा सकता है।
पूरे अभ्यास के दौरान चीनी विमानों ने कोई उकसावे वाली हरकत नहीं की और वे अपनी सीमा में ही रहे। हालांकि इस दौरान भारत ने पूरी तरह चौकसी बरत रखी थी।
चीन नहीं छोड़ रहा चालबाजी
पिछले एक साल से भारतीय विमानों ने भी लद्दाख में अपनी गतिविधि बढ़ाई है। क्षेत्र में चीनी सैनिकों और वायु सेना की तैनाती के बाद भारतीय वायु सेना भी मिग-29 समेत अन्य लड़ाकू विमानों की टुकड़ियां तैनात करती रही है। यही नहीं भारतीय वायुसेना की कमांड में पिछले साल ही शामिल हुए राफेल विमान भी नियमति रूप से लद्दाख के हवाई क्षेत्र में उड़ान भरते रहे हैं।
वहीं चीन की एक और चालाकी का पता चला है जिसके मुताबिक चीन ने भले ही पैंगोंग झील क्षेत्र में सैनिकों को हटा लिया है लेकिन उन्होंने मुख्यालय-9 और मुख्यालय-16 समेत अपने एयर डिफेंस सिस्टम को नहीं हटाया है जो लंबी दूरी पर विमानों को निशाा बना सकते हैं।
भारत ने शिनजियांग और तिब्बत क्षेत्र में होटन, गार कुंशा, काशघर, होपिंग, डकोंका जोंग, लिंजी और पंगट एयरबेस पर चीनी वायु सेना की गतिविधियों को करीब से देखा है।
भारत को लद्दाख में बढ़त
पिछले साल अप्रैल-मई में चीन के साथ तनाव के प्रारंभिक चरण में भारत ने चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए एसयू-30 और मिग-29 विमानों को पहली पंक्ति में तैनात किया था। भारत की तैयार देखकर चीन ने पूर्वी लद्दाख के हवाई क्षेत्र में कोई भी उकसाने वाला कदम नहीं उठाया था।
यहां एक बात और दिलचस्प है कि भारतीय वायुसेना को लद्दाख में चीन पर बढ़त हासिल है। चीन के लड़ाकू विमानों को बहुत ऊंचाई वाले इलाकों से उड़ान भरनी होती है जबकि भारतीय लड़ाकू विमान मैदानी इलाकों से उड़ान भर सकते हैं और जल्द ही पहाड़ी इलाकों में पहुंच सकते हैं।
भारतीय वायु सेना अपनी गति के कारण पूरे देश में तीव्र गति से विमान स्क्वाड्रनों को तैनात कर सकती है और सीमित संसाधनों के बावजूद उनका बहुत प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकती है।












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