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लद्दाख में गलवान घाटी से पीछे हटने को तैयार चीन, बाकी हिस्‍सों को छोड़ने के मूड में नहीं!

नई दिल्‍ली। भारत और चीन के बीच युद्ध के हालात बने हुए हैं और इस टकराव को खत्‍म करने के लिए मंगलवार को भारत और चीन के बीच कोर कमांडर के बीच एक और दौरा वार्ता हुई। मंगलवार सुबह 11 बजे शुरू हुई वार्ता देर रात तक जारी थी। भारत और चीन के बीच तनाव को खत्‍म करने के लिए लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर यह ऐसी तीसरी मीटिंग थी। दोनों देशों के कोर कमांडरों के बीच मीटिंग 12 घंटे से भी ज्‍यादा समय तक चली। सूत्रों के मुताबिक दोनों ही देशों की सेनाएं किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। बातचीत पर न तो भारत की तरफ से और न ही चीन की तरफ से कोई आधिकारिक टिप्‍पणी अभी की गई है।

पीपी 14, 15 और 17 से पीछे हटने को रेडी

पीपी 14, 15 और 17 से पीछे हटने को रेडी

मंगलवार को लेह स्थित 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेट जनरल हरिंदर सिंह ने शिनजियांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्‍ट कमांडर मेजर जनरल लियू लिन से तीसरी बार मुलाकात की। सरकार से जुड़े सूत्रों की मानें तो चीन पेट्रोलिंग प्‍वाइंट (पीपी)14 जो गलवान घाटी पर है, पीपी 15 और 17 से पीछे हटने को तैयार हो चुका है। उसने भारत के दावे वाली जगहों से अपने जवानों को भी पीछे करने का मन बनाया है। यानी गलवान घाटी से हॉट स्प्रिंग्‍स एरिया तक चीन ने पीछे हटने पर रजामंदी जता दी है। लेकिन पैगोंग त्‍सो पर कोई बात नहीं बनी है। हालां‍कि सूत्रों का दावा है कि पैंगोंग पर टकराव को खत्‍म को लेकर हल्‍की सी उम्‍मीद नजर आई है। पैंगोंग पर पांच मई को हिंसक झड़प हुई थी जिसमें दोनों तरफ के सैनिक भी घायल हुए थे।

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    15 जून को हुई थी हिंसक झड़प

    15 जून को हुई थी हिंसक झड़प

    एक अधिकारी की तरफ से कहा गया है कि पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) कमांडर्स ने पैंगोंग पर किसी तरह की कोई लचीला रुख नहीं अपनाया है। आने वाले समय में हकीकत सामने आएगी। इतनी जल्‍दी फिलहाल इसका हल नहीं निकलने वाला है। 22 जून को जो मीटिंग हुई थी उसमें पीएलए की तरफ से गलवान घाटी से पीछे हटने की मंशा नतजर आई थी। 15 जून को गलवान घाटी में पीपी 14 पर भारत और चीन की सेना के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे। मंगलवार को डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया और इसके समय को लेकर चर्चा हुई है।

    भारत से कहा तीन किमी तक पीछे हटने को

    भारत से कहा तीन किमी तक पीछे हटने को

    भारतीय सैनिक पैंगोंग के उत्‍तरी किनारे पर स्थित फिंगर एरिया के फिंगर 3 से फिंगर 8 तक गश्‍त करते हैं। लेकिन अब फिंगर 4 की चोटियों पर भी चीनी जवान हैं और भारत की तरफ से भी बड़े स्‍तर पर जवानों को तैनात किया गया है। ले. जनरल हरिंदर सिंह ने मांग की यहां पर यथास्थिति बहाल की जाए और साथ ही चीनी सेना तुरंत गलवान घाटी, पैगोंग त्‍सो और कई दूसरे इलाकों से वापस पीछे हटे। चीन के मेजर जनरल लियू लिन ने कहा था कि दोनों देशों की सेनाएं अहम इलाकों से दो से तीन किलोमीटर तक पीछे हट जाएं। लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह पैगोंग त्‍सो और फिंगर 4 पर चीन के इस प्रस्‍ताव को मानने के लिए तैयार नहीं थे।

    क्‍या है पैंगोंग का फिंगर एरिया

    क्‍या है पैंगोंग का फिंगर एरिया

    पैंगोग त्‍सो का फिंगर एरिया वह इलाका है जहां पर चीन की सेनाएं अड़ी हुई हैं। जब तक चीन की सेनाएं फिंगर एरिया से पीछे नहीं हटती हैं तब तक सफलता तय नहीं मानी जा सकती हैं। पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) ने फिंगर 4 और फिंगर 8 के बीच स्‍थायी तौर पर बंकर्स और ऑब्‍जर्वेशन पोस्‍ट बना ली है। सूत्रों की मानें तो फिंगर 8 से उनके बंकर्स और पोस्‍ट का हटाना डिसएंगेजमेंट की सबसे मुश्किल प्रक्रिया होगी। फिंगर एरिया में आठ चोटियां हैं और ये सभी पैंगोंग त्‍सो से साफ नजर आती हैं। ये फिंगर एरिया सरीजाप रेंज के तहत आता है।

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