चीन: एक नया कोरोना वायरस खोजने का दावा, लंबे वक्त तक कर सकता है संक्रमित
नई दिल्ली- पूरी दुनिया चीन से पैदा हुए एक कोरोना वायरस के कहर को थाम नहीं पा रही है, लेकिन चीन के शोधकर्ताओं ने इसके नए और परिवर्तित सब-टाइप वायरस खोजने का दावा किया है, जो लंबे वक्त तक लोगों को संक्रमित करता रह सकता है, क्योंकि इसके लक्षण ज्यादा तीव्र नहीं होते। चीन के शोधकर्ताओं के मुताबिक उसने जिस शख्स पर यह रिसर्च किया है, वह 49 दिनों तक संक्रमित रहा और तब जाकर ठीक हुआ जब उसे नोवल कोरोना वायरस को मात देने वाले शख्स का ब्लड प्लाज्मा चढ़ाया गया।

कोरोना वायरस का नया परिवर्तित सब-टाइप खोजने का दावा
चीन के शोधकर्ताओं ने कोविड-19 से पीड़ित एक मरीज पर किए गए अपने शोध के आधार पर दावा किया है कि हो सकता है कि उन्होंने इस वायरस का एक नया म्युटेटेड सब-टाइप खोज लिया हो, जो लंबे वक्त तक दूसरों को संक्रमित करने में सक्षम है। असल में यह रिसर्च एक मध्य आयु वर्ग के चीनी शख्स पर किया गया है, जो असाधारण तौर पर इस वायरस से 49 दिनों तक संक्रमित रहा, जो कि अब तक का सबसे ज्यादा वक्त है। हैरान करने वाली बात ये भी है कि उसमें नोवल कोरोना वायरस के हल्के लक्षण थे और ऐसा लगता है कि उसके शरीर ने वायरस के साथ एक तरह का खास संतुलन बना लिया था।

ब्लज प्लाज्मा चढ़ाकर ठीक हुआ शख्स
अगर यह रिसर्च सही साबित हुआ तो चिंता इस बात की है कि ऐसे और कई मामले हो सकते हैं, जिसमें संक्रमित व्यक्ति में ज्यादा लक्षण दिखाई न दे, लेकिन वह कई दिनों तक दूसरों को संक्रमित करता रहे। जब लंबे समय से बीमार उस व्यक्ति में सुधार नहीं दिखाई दे रहा था, तब उसे कोरोना वायरस से छुटकारा पाने वाले शख्स को ब्लड प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत पड़ गई थी। यह स्टडी 27 मार्च को सामने आई है, लेकिन दूसरे वैज्ञानिकों की ओर से इसकी छानबीन होना अभी बाकी है। चीन के जिस शख्स पर इस रिसर्च का दावा किया गया है, उसका नाम गुमनाम रखा गया। वह पहली बार 8 फरवरी को वुहान के एक अस्पताल में एक हफ्ते से बुखार आने की शिकायत लेकर पहुंचा था, लेकिन उसमें इस बीमारी के दूसरे सामान्य लक्षण जैसे कि खांसी नहीं थी।

महिला रिश्तेदार ज्यादा बीमारी हई और पहले ठीक हो गई
इससे पहले के रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि औसतन कोविड-19 का वायरस 20 दिनों तक टिका रहता है और अभी तक के जो रिपोर्ट मौजूद हैं, उसमें सबसे ज्यादा लंबा समय 37 दिनों का है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि वह संक्रमित व्यक्ति ज्यादा गंभीर तौर पर बीमार तो नहीं था, लेकिन फिर भी वायरस से खुद से नहीं लड़ पा रहा था। इसीलिए उसे खून चढ़ाकर ठीक करने की कोशिश की गई जिसका इस्तेमाल चीन कर रहा है और अमेरिका और यूके भी प्रयोग में लगे हुए हैं। यही वजह है कि उसे कोविड-19 से स्वस्थ होने वाले व्यक्ता का प्लाज्मा चढ़ाया गया। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि उस मरीज की एक बुजुर्ग महिला रिश्तेदार भी पॉजिटिव थी और उसमें ज्यादा लक्षण दिखाई दे रहे थे। लेकिन, हालत गंभीर होने के बावजूद वो अपनी उम्र के दूसरे मरीजों की तुलना में जल्द स्वस्थ हो गई।

युवाओं और बुजुर्गों दोनों को कर सकता है संक्रमित
अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि उनका रिसर्च इसी बात की ओर इशारा कर रहा है कि नोवल कोरोना वायरस का कोई नया लेकिन, माइल्ड सब-टाइप भी मौजूद है। यह कोविड-19 जितना ज्यादा संक्रमित करने की क्षमता वाला तो नहीं लगता, लेकिन इसका खात्मा कठिन है। यह युवाओं और बुजुर्गों दोनों को संक्रमित कर सकता है। बता दें कि चीन के शोधकर्ता पहले ही SARS-CoV-2 के दो सब-टाइप की चर्चा कर चुके हैं एल और एस सब-टाइप। पहले उन्होंने पाया था कि एल सब-टाइप ज्यादा संक्रमण फैलाता है। रिसर्च का निष्कर्ष ये है कि लंबे वक्त तक टिकने वाला वायरस हल्के लक्षणों की वजह से ज्यादा समय तक संक्रमण फैलाने की क्षमता रखता है और इसी लिए इसके फैलते रहने की आशंका बढ़ सकती है।












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