2013 में जिसने रमन सिंह को दिलाई विजय, 2018 में वही बना कांग्रेस का मसीहा
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 में के परिणामों ने सभी को हैरत में डाल दिया। अजित जोगी के अलग पार्टी बनाने के बाद ऐसा माना जा रहा था कि कांग्रेस इस राज्य में सबसे ज्यादा कमजोर हो गई है। इसके बाद जब मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और अजित जोगी की जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जेसीसी) के बीच जब गठबंधन हुआ तो एकमत से राजनीतिक पंडितों ने कांग्रेस पार्टी की संभावनाओं पर ग्रहण लगा दिया। भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी जब 2018 में रमन सिंह को टक्कर देने उतरी तब किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि कांग्रेस यहां पर 68 सीटों जीतकर इतिहास रच देगी और रमन सिंह जैसे कद्दावर नेतृत्व के साथ लड़ने वाल बीजेपी 15 सीटों पर सिमट जाएगी। राजनीतिक पंडितों का स्पष्ट मानना था कि अजित जोगी की पार्टी बसपा के साथ मिलकर कांग्रेस की रही-सही संभावनाओं को खत्म कर देगी, लेकिन रिजल्ट इसके एकदम उलट आया। अजित जोगी-मायावती का गठजोड़ उल्टा बीजेपी पर भारी पड़ गया। छत्तीसगढ़ के सारे सियासी समीकरण उलट-पलट करने के पीछे वही शख्स है, जिसने 2013 विधानसभा चुनाव में रमन सिंह की जीत में बड़ी भूमिका निभाई।

सतनामी समाज ने पलट दिए छत्तीसगढ़ के चुनावी समीकरण
छत्तीसगढ़ में सतनामी समाज का खास प्रभाव है। सतनामी समाज पर अजित जोगी की मजबूत पकड़ मानी जाती है। इसी समुदाय के समर्थन के आधार पर अजित जोगी की पार्टी की संभावनाओं को बल मिल रहा था। सतनामी समाज राज्य में बड़ा वोट बैंक है और इस समुदाय की 14 से 16 प्रतिशत हिस्सेदारी है। छत्तीसगढ़ में पहले चरण के लिए 12 नवंबर को होने वाले मतदान से पहले एक बड़ा घटनाक्रम हुआ, जिसके तहत सतनामी समाज के गुरु बलदास और बेटे खुशवंत साहेब समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। अब सतनामी वोटर्स के कुल प्रभाव को समझते हैं। प्रदेश में 10 सीटें शिड्यूल कास्ट (एससी) के लिए रिजर्व हैं। 2013 में यहां बीजेपी ने 10 में 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2018 में बीजेपी इन 10 सीटों में से सिर्फ 2 पर ही जीत हासिल कर पाई, जबकि 7 पर कांग्रेस जीतने में सफल रही। अजित जोगी फैक्टर इन सीटों पर पूरी तरह फेल साबित हुआ। इसके अलावा सतनामी वोटर्स के प्रभाव वाली जनरल कैटेगरी की 19 सीटों पर भी कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया। सतनामी समाज के गुरु बलदास और बेटे खुशवंत साहेब का कांग्रेस के पाले में जाना रमन सिंह को भारी पड़ गया, क्योंकि इन्होंने ही 2013 विधानसभा चुनाव में रमन सिंह की जीत इबारत में मुख्य भूमिका निभाई थी।

मिलिए उस शख्स से जिसने 2018 में लिख दी कांग्रेस की किस्मत
छत्तीसगढ़ की राजनीति में पकड़ रखने वाले बताते हैं कि एक जमाने में सतनामी समाज कांग्रेस का कोर वोटर था, लेकिन अजित जोगी का इन मतदातओं पर अच्छा होल्ड था, लेकिन कांग्रेस में रहते हुए अजित जोगी ने अपनी ही पार्टी को नुकसान पहुंचाया। छत्तीसगढ़ की राजनीति में ऐसी कई कहानियों के चर्चे आम हैं, जिनमें कहा जाता है कि 2013 में अजित जोगी ने रमन सिंह की मदद की। यहां तक कि 2018 में ऐसी खबरें आईं कि अजित जोगी और बसपा के कैंपेन के लिए बीजेपी ने पैसा खर्च किया। बहरहाल, ये तो सियासी सुगबुगाहटें हैं, अब ठोस तथ्यों की बात करते हैं। बात 2008 की है, जब सतनामी समाज के 70 लोगों के खिलाफ पुलिस पर हमले का मामला दर्ज किया। इन 70 लोगों में एक नाम सतनामी समाज के गुरु बलदास का भी था। समर्थकों ने उनकी बिना शर्त रिहाई की मांग रखी, यहां तक कि गुरु बलदास ने बेल तक के लिए एप्लाई करने से इनकार कर दिया था। इस मुद्दे को लेकर रमन सरकार और समर्थकों के बीच बातचीत हुई। पांच साल बाद यानी 2013 में गुरु बलदास ने पार्टी बनाई और 21 उम्मीदवार मैदान में उतार दिए, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि 10 एससी रिजर्व सीटों में से सिर्फ 2 पर ही उन्होंने अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे। गुरु बलदास ने हेलिकॉप्टर से प्रचार किया। उस समय एक चर्चा आम थी कि बीजेपी के खर्चे पर उन्होंने चुनाव प्रचार किया। हालांकि, सतनाम सेना एक भी सीट नहीं जीत पाई थी, लेकिन उसने कांग्रेस के वोट को बांट दिया और बीजेपी 10 एससी रिजर्व सीटों में से 9 पर जीतने में सफल रही थी, लेकिन सरकार बनने के रमन सिंह ने एससी कोटा 16 प्रतिशत से 12 प्रतिशत कर दिया। यहीं से गुरु बलदास और रमन सिंह के समीकरण बिगड़ने शुरू हो गए। 2018 विधानसभा चुनाव से ऐन पहले गुरु बलदास समर्थकों के साथ कांग्रेस के साथ हो गए और बाजी पलट गई।

रमन सिंह ने अजित जोगी के जरिए काउंटर करने का प्रयास किया पर विफल रहे
रायपुर के कई पत्रकारों के कानों तक ऐसी खबरें आईं कि अजित जोगी-मायावती की पार्टी के कैंपेन को बीजेपी ने फंड किया। रमन सिंह ने 2018 में सतनामी समाज के गुरु को अजित जोगी से काउंटर करने का प्रयास किया। जिस प्रकार 2013 में सतनामी समाज के गुरु से रमन सिंह ने अजित जोगी काउंटर किया था, लेकिन इस बार उनका दांव नहीं चला, क्योंकि अजित जोगी की अपील काम नहीं आई और कांग्रेस को सतनामी समाज का भरपूर समर्थन हासिल हो गया।
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