छत्‍तीसगढ़ चुनाव: बेटा कभी चुनाव हारा नहीं और पिता ने कभी इलेक्‍शन जीता नहीं

रायपुर। हर चुनाव का अपना सियासी गणित होता है। विधानसभा चुनाव में अलग फैक्‍टर काम करते हैं तो लोकसभा चुनाव में कुछ और। किसी राज्‍य में हर पांच साल बाद सरकार बदल जाती है तो कहीं पर पिछले 15 सालों से एक ही पार्टी की सत्‍ता चली आ रही है। मतलब मतदाताओं का मिजाज अलग-अलग है, लेकिन सियासी आंकड़ेबाजी से अलग कई किस्‍से कहानियां ऐसे हैं, जो बताते हैं चुनावों में किस्‍मत कनेक्‍शन का रोल भी बड़ा अहम होता है। कुछ ऐसी ही कहानी है छत्‍तीसगढ़ के नेता लखीराम अग्रवाल की।

लखीराम अग्रवाल चार चुनाव लड़े और चारों बार हारे

लखीराम अग्रवाल चार चुनाव लड़े और चारों बार हारे

भाजपा नेताओं की लंबी सूची बहुत कम से ऐसे नाम हैं, जिन्‍हें लखीराम अग्रवाल जैसा सम्‍मान मिला हो, लेकिन वह कभी चुनाव नहीं जीत पाए। लखीराम अग्रवाल आज इस दुनिया में नहीं हैं। पहले चुनाव में लखीराम चौथे स्‍थान पर रहे। उन्‍होंने 1962 में पहला चुनाव धरमजयगढ़ सीट से लड़ा था। दोबारा वह इसी सीट से लड़े और दोबारा हार गए। तीसरी बार लखीराम अग्रवाल ने सीट बदलकर चुनाव लड़ा। 1977 में वह सरिया विधानसभा सीट से मैदान में उतरे, लेकिन किस्‍मत ने इस बार भी धोखा ही दिया। चौथी बार लखीराम अग्रवाल खरसिया से लड़े और यहां भी हार ही हाथ लगी। वह चार बार चुनाव लड़े और हर बार हारे, लेकिन जो काम पिता नहीं कर पाए वह बेटे ने कर दिखाया। लखीराम अग्रवाल के बेटे ने पिता को वो सपना पूरा किया।

पिता ने लगातार चार चुनाव हारे, बेटे ने लगातार चार चुनाव जीते

पिता ने लगातार चार चुनाव हारे, बेटे ने लगातार चार चुनाव जीते

लखीराम अग्रवाल के बेटे का नाम है अमर अग्रवाल। इन्‍होंने आज तक हार का मुंह नहीं देखा। जब भी चुनावी मैदान में उतरे विपक्षी को शिकस्‍त ही खानी पड़ी। अमर अग्रवाल बिलासपुर सीट से लगातार चार चुनाव जीतते आ रहे हैं। पहला चुनाव उन्‍होंने 1998 में जीता। 2003 में भी उन्‍होंने कांग्रेसी प्रत्‍याशी को हराया। तीसरी बार भी उन्‍होंने जीत दर्ज की और चौथी बार में यानी 2013 में भी बड़े अंतर से जीत दर्ज करने में सफल रहे। 2003 में अमर अग्रवाल पहली बार रमन सरकार में मंत्री बने। 2006 में स्वास्थ्य विभाग का प्रभार भी उन्‍होंने संभाला। 2008 में अमर अग्रवाल को वाणिज्य कर, स्वास्थ्य और राजस्व जैसे विभागों का दायित्व सौंपा गया।

पांचवीं बार चुनावी मैदान में हैं अमर अग्रवाल

पांचवीं बार चुनावी मैदान में हैं अमर अग्रवाल

छत्‍तीसगढ़ में विधासभा चुनाव 2018 के लिए 20 नवंबर को मतदान होना है और अमर अग्रवाल पांचवीं बार भी चुनावी मैदान में हैं। देखना रोचक होगा कि क्‍या इस बार भी अमर अग्रवाल की जीत का रिकॉर्ड बना रहता है या नहीं। छत्‍तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के परिणाम 11 दिसंबर को आने हैं, तभी पता चलेगा कि इस बार किस्‍मत उनका कैसा साथ देती है। अमर अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ में 2003 में पहली बार बनी भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री का पद संभाला और तब से लेकर अब तक मंत्री पद पर बने हुए हैं। अमर अग्रवाल के पिता लखीराम अग्रवाल को जनसंघ की स्थापना और छत्‍तीसगढ़ में भाजपा को खड़ा करने का श्रेय प्राप्‍ है। लखीराम अग्रवाल के पांच बेटों में अमर अग्रवाल ने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया। वह बचपन से ही पिता के साथ सक्रिय रहे।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+