'क्योंकि हमारा शेर यात्रा पर निकला है': कांग्रेस ने चीता कार्यक्रम को बताया 'प्रधानमंत्री का तमाशा'
नई दिल्ली, 17 सितंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में शनिवार को नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को छोड़ा। भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टर की मदद से 8 चीतों को कूनो नेशनल पार्क लाया गया था। वहीं अब चीतों के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ चुकी है। कांग्रेस ने 'भारत जोड़ो यात्रा' के बीच इस कार्यक्रम को 'पीएम मोदी का तमाशा' बताया।

दरअसल, अपने बयान में पीएम मोदी ने कहा, 'ये दुर्भाग्य रहा कि हमने 1952 में चीतों को देश से विलुप्त तो घोषित कर दिया, लेकिन उनके पुनर्वास के लिए दशकों तक कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ। आज आजादी के अमृतकाल में अब देश नई ऊर्जा के साथ चीतों के पुनर्वास के लिए जुट गया है।' पीएम मोदी ने आगे कहा कि दशकों पहले जैव-विविधता की सदियों पुरानी जो कड़ी टूट गई थी, विलुप्त हो गई थी, आज हमें उसे फिर से जोड़ने का मौका मिला है। आज भारत की धरती पर चीता लौट आए हैं।
वहीं पीएम मोदी के इस बयान पर अब कांग्रेस वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने पलटवार किया है। उन्होंने चीते के साथ अपनी एक पुरानी तस्वीर शेयर कर लिखा कि पीएम शासन में निरंतरता को शायद ही कभी स्वीकार करते हैं। चीता प्रोजेक्ट के लिए 25.04.2010 को केपटाउन की मेरी यात्रा का जिक्र तक ना होना इसका ताजा उदाहरण है। आज पीएम ने बेवजह का तमाशा खड़ा किया। ये राष्ट्रीय मुद्दों को दबाने और भारत जोड़ों यात्रा से ध्यान भटकाने का प्रयास है।
कांग्रेस नेता ने आगे बताया कि साल 2009-11 के दौरान जब बाघों को पहली बार पन्ना और सरिस्का में स्थानांतरित किया गया तब कई लोग आशंकाएं व्यक्त कर रहे थे। वे गलत साबित हुए। चीता प्रोजेक्ट पर भी उसी तरह की भविष्यवाणीयां की जा रही हैं। इसमें शामिल प्रोफेशनल्स बहुत अच्छे हैं। मैं इस प्रोजेक्ट के लिए शुभकामनाएं देता हूं!
वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जयराम रमेश के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, 'क्योंकि हमारा शेर भारत जोड़ो यात्रा पर निकला हुआ है तो भारत तोड़ने वाले विदेश से अब चीते ला रहे हैं।'
मालूम हो कि कांग्रेस ने शुक्रवार को तत्कालीन पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश की 2010 में दक्षिण अफ्रीका में एक चीते के साथ एक तस्वीर पोस्ट की और कहा कि 2008-09 में प्रोजेक्ट चीता का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इस परियोजना को मनमोहन सिंह सरकार ने मंजूरी दी थी। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने इस परियोजना पर रोक लगा दी और इसे 2020 में अनुमति दी।












Click it and Unblock the Notifications