धर्मांतरण रैकेट चलाने वाले Changur Baba की 200 करोड़ की बेनामी संपत्ति जब्त, विदेशी फंडिंग की भी जांच

Changur Baba News: उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण का रैकेट चलाकर दर्जनों लड़के-लड़कियों को अपने जाल में फंसाने वाले जलालुद्दीन करुमुल्ला उर्फ छांगुर बाबा दाढ़ीवाले के काले कारनामों की पोल खुल रही है। धर्मांतरण रैकेट चलाने के अलावा उसने देश-विदेश में करोड़ो की संपत्ति भी बनाई। विदेशी फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए देश के अलग-अलग शहरों में बेनामी संपत्ति जमा किया। प्रवर्तन निदेशालय को बाबा के पास से कई शहरों में प्रॉपर्टी के कागजात मिले हैं। पुणे में 200 करोड़ की बेनामी संपत्ति जब्त की गई है।

इनकम टैक्स, फेमा और ईडी की टीम मिलकर जलालुद्दीन करुमुल्ला उर्फ छांगुर बाबा दाढ़ीवाले की बेनामी संपत्तियों की जांच कर रही हैं। जांच में पता चला है कि जलालुद्दीन ने पुणे, मुंबई समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों में काफी संपत्ति अपने और अपने गैंग वालों के नाम पर बनाई है। इतना ही नहीं आदिवासियों से पुणे के मावल तहसील में 16 करोड़ की जमीन भी हथिया ली। इस जमीन की मौजूदा कीमत 200 करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है।

Changur Baba

Changur Baba ने बनाई 300 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति

ईडी के मुताबिक, छांगुर बाबा और उसके सहयोगियों ने 300 करोड़ रुपए से अधिक की बेनामी संपत्तियां जुटाई। इन संपत्तियों का लाभार्थी छांगुर बाबा ही है। जांच टीम को अब तक पुणे में तीन आलीशान फ्लैट, एक ट्रस्ट (Aasvi Charitable Trust) और 40 बैंक खातों में 106 करोड़ रुपए की संदिग्ध धनराशि मिली है।

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बाबा के रैकेट में शामिल लोगों और ट्रस्ट के 8 खातों में केवल तीन महीनों में 68 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है। सिर्फ तीन महीने में सात करोड़ की राशि विदेशी चंदे के रूप में मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स की जांच में पता चला है कि धर्मांतरण का रैकेट चलाने के साथ ही बाबा मनी लॉन्ड्रिंग में भी शामिल था।

आदिवासियों की जमीन हड़पी, 200 करोड़ में बेचने की थी तैयारी

ईडी की जांच टीम को छांगुर बाबा और उसके सहयोगियों के नाम पर तैयार जमीन के कागज मिले हैं। नवीन घनश्याम रोहरा, छांगुर करीमुल्ला और मोहम्मद अहमद खान के नाम पर एएमओयू बना था। यह पुणे के मावल तहसील के आदिवासियों की वही जमीन है जिसे महज 16 करोड़ में बाबा ने खरीदी थी। इसे 200 करोड़ में बेचकर मोटा मुनाफा कमाने का इरादा था। 16 करोड़ की इस जमीन के लिए पहला भुगतान 49.80 लाख रुपए के तौर पर हुआ था। जांच टीम के सामने आया है कि यह रकम विदेशी फंडिंग के जरिए दी गई थी। ईडी और फेमा की टीम को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कई और बेनामी संपत्तियों के राज खुलेंगे।

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