Chandrayaan-3: 14 जुलाई को लॉन्च होगा चंद्रयान 3, मिशन के लिए स्वतंत्रता दिवस होगा खास
Chandrayaan 3 launch date time: चंद्रयान 3 इस महीने 14 जुलाई को लॉन्च होगा। इसकी पुष्टि बुधवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने की है। इसरो के मुताबिक उस दिन दोपहपर बाद 2.35 पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से इसे लॉन्च किया जाएगा।
इसकी लॉन्चिंग का समय इसलिए बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि इससे यह संभावनाएं बढ़ गई है कि यह देश के 76वें स्वतंत्रता दिवस पर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंड कर सकता है। देश का यह बहुत ही महत्वाकांक्षी मिशन है, जिसपर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

क्यों खास है चंद्रयान 3 मिशन?
वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रयान3 मिशन लूनर रेगोलिथ की थर्मोफिजिकल प्रॉपर्टीज, चंद्रमा पर भूकंप, चांद की सतह का प्लाज्मा पर्यावरण और लैंडिंग स्थल के आसपास के क्षेत्र में उसकी मौलिक संरचना का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिक उपकरण ले जा रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों के मुताबिक चंद्रयान 3 अन्य प्रायोगिक उपकरणों से पृथ्वी के स्पेक्ट्रो-पोलरिमेट्रिक संकेतकों का अध्ययन करेगा।

इस साल मार्च में चंद्रयान 3 स्पेसक्राफ्ट ने आवश्यक परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूर्ण किया था। इससे इस अंतरिक्ष यान के लॉन्च के दौरान होने वाले शक्तिशाली कंपन और भारी ध्वनिक वातावरण का सामना करने की क्षमता की पुष्टि हुई।
22 जुलाई, 2019 को लॉन्च हुआ था चंद्रयान 2
चंद्रयान 3 अंतरिकक्ष यान का मिशन प्रोफाइल करीब-करीब चंद्रयान 2 जैसा ही है। इस मिशन को इस तरह से तैयार किया गया है, जिससे चंद्रयान 2 के अधूरे कार्यों को पूरा किया जा सके। चंद्रयान 2 को 22 जुलाई, 2019 को लॉन्च किया गया था और यह एक महीने बाद 20 अगस्त को चांद की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश भी कर गया था।

सॉफ्ट लैंडिंग के अंतिम क्षणों हार्ड लैंडिंग की स्थिति पैदा हुई
2 सितंबर, 2019 को लेंडर और रोवर अंतरिकक्ष यान से अलग भी हो गए थे और यह उसकी कक्षा में नीचे भी उतरना शुरू हो गया था। चार दिनों बाद 6 सितंबर, 2019 को चांद की सतह पर इसकी सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश हुई, लेकिन आखिरी समय में हार्ड लैंडिंग का सामना करना पड़ा।
चंद्रयान 3 मिशन के लिए स्वतंत्रता दिवस होगा खास
चंद्रयान 3 मिशन में कुछ बदलाव किए गए हैं। इस लूनर ऑर्बिटर में प्रपल्शन मॉड्यूल का इस्तेमाल किया गया है, जो लैंडर और रोवर को पृथ्वी से चंद्रमा तक ले जाएगा। अगर इस अंतरिक्ष यान को 13 जुलाई को लॉन्च किया जाता तो यह चांद की कक्षा में 10 जून को पहुंच सकता था। इसका मतलब इसरो के वैज्ञानिक इसे भारत के 76वें स्वतंत्रता दिवस पर इसे चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने की कोशिश कर सकते हैं।
अगर किसी वजह से उस दिन सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास टालना पड़ गया तो वैज्ञानिक जल्द ही अगली कोशिश कर सकते हैं। वैज्ञानिकों से मिली जानकारी के मुताबिक इसरो 19 जुलाई के बाद भी इस मिशन को लॉन्च कर सकता था, लेकिन इससे ईंधन की खपत बहुत बढ़ जाएगी।
चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा चंद्रयान 3
चंद्रयान 3 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह का यह क्षेत्र पानी की मौजूदगी को लेकर महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि अमेरिका चंद्रमा के उसी इलाके में अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस मिशन के तहत बेसकैंप बनाने की तैयारी में है तो चीन तीन रोवरों का इस्तेमाल करके एक रिसर्च स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है।
अगले दो दशकों तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के मानवीय गतिविधियों के लिए दिलचस्प बाहरी दुनिया बनने की संभावना है। क्योंकि, यहां के लिए अनेक वैज्ञानिक योजनाएं तैयार हैं, जिसे आने वाले वर्षों में विभिन्न देश अलग-अलग समयों पर अंजाम देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।












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