चंद्रयान-3: 'कभी मामू कभी जानू', अगर चांद ना होता तो क्या होता? जानिए कुछ रोचक बातें
Chandrayaan-3: आज भारत ने विज्ञान की दुनिया में स्वर्णिम इतिहास लिखा है। Chandrayaan-3 ने चांद की सतह पर सफल लैंडिंग कर ली है। पूरी दुनिया की निगाहें आज भारत की ओर लगी हुई थी मालूम हो कि चंद्रयान-3 का लैंडर 40 दिनों की लंबी यात्रा के बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव सतह पर उतरा है।

भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है,अभी तक ये सफल कारनामा अमेरिका, USSR (अब रूस) और चीन ही कर चुके थे। आपको बता दें कि चंद्रमा हमेशा से वैज्ञानिकों का पसंदीदा सब्जेक्ट रहा है लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि अगर दुनिया में चांद नहीं होता तो क्या होता?
चलिए जानते हैं चांद के बारे में कुछ रोचक बातें...
दिन-रात छोटे होते
सबको पता है कि पृथ्वी सूर्य के चारों और चक्कर लगाती है और चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है। पृथ्वी की परिक्रमा से ही दिन-रात तय होते हैं लेकिन अगर चांद नहीं होता तो दिन-रात 24 घंटे के बजाय 12-12 घंटे के होते और यही नहीं तब एक साल में 365 दिन नहीं होते बल्कि दिनों की संख्या हजारों में होती( 1000-1400) के बीच में होती है।
व्यक्ति का वजन कम हो जाता
यही नही पृथ्वी की तुलना में चांद पर Gravitational force यानी कि गुरुत्वाकर्षण कम है इसलिए चंद्रमा की सतह पर व्यक्ति का वजन कम हो जाता है।
4.5 अरब साल पहले हुआ था चांद का जन्म
चंद्रमा पृथ्वी का विशाल उपग्रह है, जिसका जन्म 4.5 अरब साल पहले हुआ था और पृथ्वी से चंद्रमा के बीच की दूरी करीब 16.5 फीसदी तक है।
आकाश नीला नहीं काला दिखता है
चंद्रमा पर वायुमंडल नहीं है और ना ही यहां पर प्रकाश का प्रकीर्णन होता है इसलिए इसकी सतह से आकाश नीला नहीं बल्कि काला दिखाई देता है।
गोल नहीं है चांद
चांद पूर्णिमा के दिन पूरे आकार नें नजर आता है लेकिन असल में ये गोल नहीं बल्कि अंडाकार है।
41 प्रतिशत हिस्सा नहीं दिखता
पृथ्वी से देखने पर चांद का केवल 51 फीसदी हिस्सा ही नजर आता है जबकि 41 प्रतिशत हिस्सा दिखाई नहीं पड़ता है।
'कभी मामू कभी जानू'
भारतीय साहित्य में चांद का जिक्र कभी सुंदरता के लिए तो कभी प्रेम और कभी महूबबा के लिए हुआ है। कविता और शायरी में चंद्रमा को तो प्रमुखता से जगह दी गई है, कोई इसे 'मामू' कहता है तो किसी को इसमें 'जानू' नजर आता है।












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