मोदी सरकार की इस योजना से देश के किसान होंगे मालामाल, जानें क्या है सॉयल हेल्थ कार्ड और क्या है इसके फायदे
नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने हमेशा किसानों के विकास की बात की। किसानों के विकास के लिए सरकार ने कई योजनाएं चलाई। इन योजनाओं का मकसद किसानों को आर्थिक और मानसिक दोनों रुपों से मजबूत बनाना है। सरकार की इस योजनाओं का फायदा तभी है जब ये अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचे और किसानों को भी इन योजनाओं के बारे में जानकारी हो। इन योजनाओं के बारे में जानने के लिए किसान अपने आस-पास के बैंकों और स्वास्थ्य केंद्रों से भी पता कर सकते हैं। इन्हीं योजनाओं में से एक योजना है सॉयल हेल्थ कार्ड। मोदी सरकार ने किसानों के लिए सॉयल हेल्थ कार्ड योजना की शुरुआत की है, जिसका मकसद किसानों को उनकी मिट्टी के बारे में अधिक से अधिक जानकारी मुहैया करना है। इस योजना के अंतर्गत किसान अपनी मिट्टी में उपलब्ध बड़े और छोटे पोषक तत्वों का पता लगा सकते हैं, जिससे वो उर्वरकों का उचित प्रयोग करने में सक्षम हो पाते हैं।

क्या है सॉयल हेल्थ कार्ड
सॉयल हेल्थ कार्ड मतलब वो कार्ड जिसकी मदद से किसान ये पता कर सकते हैं कि उनके खेत को कितने खाद की जरूरत है, उनके खेत की मिट्टी किस फसल के लिए उपयोगी है। इस स्कीम के तहत पहचाना जाता है कि किसानों के खेत की मिट्टी में कौन सा खाद, कितना पानी जैसी चीजें चाहिए। साल 2015 में लॉन्च की गई इस योजना के तहत सरकार किसानो के लिए एक सॉइल कार्ड जारी करती है। जिसका मकसद खेत की मिट्टी की गुणवत्ता का अध्ययन कर किसानों को अच्छी फसल प्राप्त करने में सहायता करना है।

कैसे फायदा पहुंचाता है सॉयल हेल्थ कार्ड
इस स्कीम के तहत किसानों को अपने खेतों की सेहत पता चलती है। उन्हें पता चलता है कि उनके खेत की मिट्टी कैसी है और उसे किसकी जरूरत है। अगर मिट्टी की क्वालिटी अच्छी होगी तो फसल अच्छी होगी और किसानों का फायदा होगा। इसी मकसद के साथ सरकार ने किसानो के लिए यह कार्ड जारी किया है। इस योजना का देशभर किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड मुहैया कराना है। किसानों को अपने खेत और जमीन के लिए 3 साल में केवल 1 बार सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किया जाता है।

क्या है सॉयल हेल्थ कार्ड की विशेषता
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मई 2016 तक देश भर में करीब 1 करोड़ 80 लाख किसानों को और यूपी में 14 लाख 24 हजार किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड बांटे गये हैं। इस योजना के तहत अब तक सार्किल 1 के तहत 2,53,49,546 सैंपल इकट्ठे और टेस्ट किए गए हैं। इस कार्ड की विशेषता की बात करें तो भारत सरकार का इस सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम के तहत 14 करोड़ किसानों को जोड़ा जाना है। इस सॉयल हेल्थ कार्ड में किसानों लोगो की जमीं की मिट्टी की पूरी जानकारी होती है। एक खेत के लिए हर 3 साल में एक बार हेल्थ कार्ड जारी किया जाता है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड में मिट्टी के नमूने का पूरी तरह से जांच करने के बाद रिपोर्ट तैयार की जाती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना पर केंद्र सरकार ने 568 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की है।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के फायदे
इस योजना का फायदा सीधे-सीधे किसानों की आमदनी से जुड़ा है। इस सॉयल हेल्थ कार्ड से पता चलता है कि मिट्टी में कितना पोषक तत्व शामिल है, जिससे किसानों को खाद डालने में मदद मिलती है। इस हेल्थ कार्ड से पता चलता है कि किस मिट्टी में कौन सी फसल उगानी चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा आमदनी हो। नियमित रूप से मिट्टी की रिपोर्ट होने से किसानों को लंबे समय तक मिट्टी को स्वस्थ्य रखने में मिदद मिलती है, जिससे का फायदा उनकी आमदनी पर होता है।इस योजना के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करें https://soilhealth.dac.gov.in/#












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