तो नरेंद्र मोदी हैं सीजफायर वॉयलेशन की वजह!
जम्मू। 1 अक्टूबर से लेकर सात अक्टूबर तक 17 सीजफायर वॉयलेशन, छह लोगों की मौत, करीब 45 लोगों घायल और करीब 10,000 लोगों का अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगहों पर जाना, यह नतीजा है पाकिस्तान की ओर से हो रही लगातार फायरिंग का।

जम्मू में स्कूल बंद हो चुके हैं और गांव अब 'घोस्ट टाउन,' में तब्दील हो रहे हैं। पाक की निराशा और हताशा नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे के बाद और बढ़ती नजर आ रही है।
मोदी और ओबामा की मुलाकात से चिढ़ा पाक
पाक को करारा जवाब भारत की ओर से तो दिया जा रहा है लेकिन इसके बावजूद पाक अपनी हरकतों से बाज आने को तैयार नहीं है। अगर तारीख पर गौर करें तो एक अक्टूबर को पाक ने फिर से भारतीय सीमा पर गोलियां बरसानी शुरू की है।
ठीक उन 48 घंटों के बाद जब नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की।मोदी की यह मुलाकात और अमेरिका में मोदी को मिला स्वागत पाकिस्तान के लिए पहले से ही मुसीबत और चिढ़ की वजह बना हुआ था।
कश्मीर नहीं बन सका इंटरनेशनल इश्यू
जब यूएनजीए में प्रधानमंत्री मोदी की ओर से पाक को कश्मीर के मुद्दे पर दो टूक जवाब दिया गया था उसी समय कहीं न कहीं इस बात का इशारा मिल गया था कि पाक इस बात का बदला जरूर लेगा।
पाक के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर के जिस मुद्दे को यूनाइटेड नेशंस जनरल एसेंबली में एक इंटरनेशनल इश्यू बनाने की जो कोशिश की, उसे मोदी ने पूरी तरह से विफल कर दिया।
पाक सेना अधिकारी का जवाब निराशा का प्रतीक
मंगलवार को एक भारतीय न्यूज चैनल पर जब पाक एयरफोर्स के एक वरिष्ठ रिटायर्ड अधिकारी बतौर मेहमान बहस का हिस्सा बने तो उनकी ओर से जो जवाब दिया गया, उससे भी पाक की हताशा साफ झलकी।
रिटायर्ड एयर मार्शल आबिद राव ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत को यह सोचकर खुश नहीं होना चाहिए कि मोदी को अमेरिका ने इतना सम्मान दिया, ओबामा ने उनके साथ इतना समय बिताया और उनकी बातों को सुना।
भारत को यह जान लेना चाहिए कि अमेरिका पाक के साथ था और हमेशा रहेगा। अगर वह भारत के पक्ष में है तो जरूर उसका कोई छिपा हुआ एजेंडा होगा।
लोकसभा चुनावों से पहले की छटपटाहट
मंगलवार को लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद की ओर से जो ट्वीट किया गया उसमें भी उसने नरेंद्र मोदी को ही फायरिंग के लिए जिम्मेदारी ठहराया। अप्रैल-मई में देश में संपन्न लोकसभा चुनावों से पहले ही दुनिया के साथ ही पाक को भी इस बात का अंदाजा लग चुका था कि मोदी भारत के प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
पाक मीडिया की ओर से जनवरी से ही इस तरह के बयान आने लगे जिनमें मोदी को लेकर एक अजीब तरह की घबराहट देखने को मिल रही थी।
पाक की ओर से सीजफायर वॉयलेशन अगस्त से ही काफी तेजी से जारी है। भारत ने पाक के साथ जो सचिव स्तर की वार्ता कैंसिल करने का फैसला लिया उसके बाद पाक के तेवर और उग्र हो गए थे लेकिन बाढ़ ने शायद उसकी हरकतों को नियंत्रित कर दिया।
वहीं अब पाक, कश्मीर में बाढ़ के बाद उपजे हालातों का फायदा उठाने की फिराक में है।












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