'पाकिस्तान ने सिर्फ दुश्मनी दिखाई, Fake News से भी लड़ना पड़ा', ऑपरेशन सिंदूर पर CDS चौहान की 5 बड़ी बातें
CDS Anil Chauhan (Operation Sindoor): चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने सिंगापुर में शांगरी-ला डायलॉग में कहा कि पाकिस्तान से सिर्फ अब तक दुश्मनी और धोखा ही मिला है। ताली एक हाथ से नहीं बजती है, इसलिए पाकिस्तान से दूरी ही सबसे बेहतर रणनीति हो सकती है।
जनरल अनिल चौहान ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लगभग 15 फीसदी वक्त झूठी और फर्जी खबरों से निपटने में लग गया। इससे ये बात तो साबित होता है कि भारत को अब 'इनफार्मेशन वारफेयर' के लिए तैयार हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की रणनीति फैक्ट बेस्ड कम्युनिकेशन पर टिकी रही, इसलिए हमने जवाब देने में देरी की लेकिन सटीक जवाब दिया। आइए जानें जनरल अनिल चौहान की 5 बड़ी बातें?

1. ऑपरेशन सिंदूर: 'मल्टी-डोमेन' जंग का नया रूप
CDS जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर एक "नॉन-कॉन्टैक्ट" और "मल्टी-डोमेन" जंग का एक नया रूप था। यह केवल पारंपरिक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि साइबर क्षमताएं, खुफिया जानकारी, भ्रामक सूचनाओं का प्रबंधन, और थल, वायु, जल और साइबर क्षेत्र में कई बलों का एक साथ इस्तेमाल किया गया था।
जनरल चौहान ने बताया कि इस बदलाव के कारण जंग की शैली पूरी तरह बदल गई है -अब लड़ाइयां सिर्फ बड़े और स्थायी सैन्य प्लेटफॉर्म्स पर आधारित नहीं होती हैं।
उन्होंने कहा, "आधुनिक जंग अब एक जटिल रूप ले चुका है, जिसमें रणनीतिक, ऑपरेशनल और सामरिक स्तरों का मेल, पुराने और नए क्षेत्रों (जैसे थल, वायु, जल, साइबर और अंतरिक्ष) का समय और स्थान सब बदल रही हैं।''
2. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 15% वक्त झूठी खबरों से लड़ने में लगी: जनरल चौहान
जनरल अनिल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान झूठी और भ्रामक खबरों से निपटना एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा कि इस मिशन में करीब 15% फोर्स की मेहनत सिर्फ फेक न्यूज और गलत जानकारी से निपटने में लगी।
उन्होंने कहा, ''फेक न्यूज से लड़ना लगातार चलने वाली एक प्रक्रिया थी। हमने सोच-समझकर और संतुलित कम्युनिकेशन रणनीति अपनाई। हम हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते थे, क्योंकि गलत जानकारी तेजी से लोगों की सोच को बदल सकती है-खासकर जब ऑपरेशन बड़े स्तर पर चल रहा हो।''
जनरल चौहान ने ये भी कहा कि भारत को तथ्यों और सबूतों के आधार पर अपनी बात सामने रखनी चाहिए, भले ही जवाब देने में थोड़ी देर हो जाए। इस बात को समझाते हुए उन्होंने एक उदाहरण भी दिया, ''ऑपरेशन की शुरुआती तीन दिनों में दो महिला अफसर ही मीडिया से बात कर रही थीं, क्योंकि उस वक्त हमारी मुख्य सैन्य लीडरशिप मैदान में एक्टिव ऑपरेशन में व्यस्त थी। 10 तारीख के बाद ही DGMOs (डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन्स) ने मीडिया को जानकारी देना शुरू किया।''
3. भारत साइबर हमलों के बावजूद मजबूत बना रहा: CDS जनरल अनिल चौहान
CDS जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ से साइबर हमले हुए, लेकिन भारत के सैन्य सिस्टम पर इनका कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।
उन्होंने बताया, "हमारे सैन्य सिस्टम एयर-गैप्ड हैं, यानी ये इंटरनेट से जुड़े नहीं होते, इसलिए ये काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं। कुछ हमले पब्लिक वेबसाइट्स जैसे स्कूलों की साइट्स पर हुए होंगे, लेकिन इससे हमारी ऑपरेशनल क्षमताएं प्रभावित नहीं हुईं।"
4. "इंटीग्रेटेड टेक" और रियल टाइम नेटवर्किंग अहम हैं: CDS
CDS जनरल अनिल चौहान ने "इंटीग्रेटेड टेक" और रियल टाइम नेटवर्किंग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''मॉडर्न वारफेयर में सबसे जरूरी एयर, लैंड और समुद्र और साइबर डोमेन में "इंटीग्रेटेड टेक" और रियल टाइम नेटवर्किंग अहम होता है। अगर आपके पास बढ़िया तकनीक है, लेकिन यह जुड़ी नहीं है, तो आप इसका पूरा लाभ नहीं उठा सकते।''
5. हमें और ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर टूल्स की जरूरत होगी: CDS
ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक जंग उपकरणों जैसी नई क्षमताओं के लिए विशेष इकाइयों की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, "हमें ड्रोन, ईडब्ल्यू, यूटीएपी (मानवरहित टीमिंग एरियल प्लेटफॉर्म) के लिए अलग-अलग संगठनों की आवश्यकता होगी।"
जनरल चौहान ने सैन्य संरचना और प्रशिक्षण में सुधार के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "पहले हमारे पास सेना में वास्तविक संयुक्तता या एकीकरण नहीं था। अब, पहल और परिचालन अनुभवों के बाद, हम इंटीग्रेटेड कमांड और अधिक लचीले ढांचे की ओर बढ़ रहे हैं।"












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