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Menstrual leave: कामकाजी महिलाओं को मिलेगी पेड पीरियड्स लीव? जानिए SC ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 'नीतिगत विचारों के संबंध में यह उचित होगा कि याचिकाकर्ता महिला और बाल विकास मंत्रालय से संपर्क करे।'

Menstrual leave:

Menstrual Leave: देश की सर्वोच्च अदालत यानी कि सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया, जिसमें छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान छुट्टी देने की बात कही गई थी। कोर्ट का कहना है कि इस याचिका पर सुनवाई होने या बात करने पर हो सकता है कि लोग छुट्टी के चलते महिलाओं को जॉब देने से परहेज करें। आपको बता दें कि कोर्ट में ये याचिका दिल्ली निवासी और अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर की गई थी।

ये तो पॉलिसी मैटर है: मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ की पीठ

इस मामले पर मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 'नीतिगत विचारों के संबंध में यह उचित होगा कि याचिकाकर्ता महिला और बाल विकास मंत्रालय से संपर्क करे क्योंकि कोई भी न्यायिक आदेश वास्तव में महिलाओं के लिए उल्टा या गलत साबित हो सकता है, ये पॉलिसी मैटर है और इस पर सोच विचार कर कदम उठाना चाहिए।'

पीरियड्स लीव पेड होनी चाहिए: याचिकाकर्ता

आपको बता दें 11 जनवरी 2023 को दायर की गई याचिका में दिल्ली के वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा था कि 'महिलाओं को मेटरनिटी लीव तो मिलती है और वो लीव पेड होती है लेकिन पीरियड्स को लेकर इस तरह का कोई नियम नहीं है, हालांकि कुछ कंपनियां जरूर अपनी इच्छा से महिलाओं को पीरियड्स के दौरान छुट्टी दे देती है लेकिन इसको लेकर कोई सरकारी नियम नहीं है, जबकि मेरे ख्याल से नियम होना चाहिए।'

'बहुत सारी महिलाओं को असहनीय दर्द होता है'

उन्होंने आगे कहा था कि 'मासिक धर्म के दौरान बहुत सारी महिलाओं को असहनीय दर्द होता, वो उस दौरान बहुत सारे मानसिक और शारीरिक पीड़ा और दवाब से गुजरती हैं, इसलिए याचिका में पेड पीरियड लीव की बात कही गई थी। हर महिला मासिक धर्म से गुजरती है, जो कि एक कुदरती प्रक्रिया है, ये लीव कोई लग्जरी तो हुई नहीं और ना ही इसमें किसी महिला को अतिरिक्त रूप से कुछ दिया जा रहा है। ये तो उनकी जरूरत है।'

केरल और विदेश का जिक्र

उनकी याचिका में केरल का भी जिक्र था , जहां सरकार ने स्‍टेट हायर एजूकेशन के अंतर्गत आने वाले सभी यूनिवर्सिटी और स्कूलो में छात्राओं के लिए पीरियड लीव लागू कर दी गई है। इसी के साथ ही याचिका में UK, चीन, जापान, ताइवान, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, स्पेन और जाम्बिया का भी जिक्र था , जहां पीरियड लीव महिलाओं को दी जा रही है।

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