शहीद अंशुमान की पत्नी स्मृति नहीं ले गई सारा पैसा, माता-पिता को भी मिली रकम, सेना के अफसरों का NOK पर खुलासा!
Shaheed Captain Anshuman Singh (NOK): भारतीय सेना के शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह के पिता रवि प्रताप सिंह और माता मंजू देवी ने अपनी विधवा बहू स्मृति सिंह के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। माता-पिता ने आरोप लगाया था कि उन्हें अपनी बहू को भेंट किए गए कीर्ति चक्र को छूने का भी मौका नहीं मिला और उन्होंने वित्तीय सहायता के लिए भारतीय सेना के निकटतम परिजन (NoK) मानदंडों में बदलाव की भी मांग की है।
इन सभी विवादों के बीच सेना के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि एक करोड़ रुपये, जो आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड (AGIF) द्वारा दिए गए हैं, वो शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह की पत्नी स्मृति सिंह और और माता-पिता के बीच बांटा गया है। वहीं पेंशन सीधे स्मृति सिंह को जाती है।

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इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से जो 50 लाख रुपये सहायता की घोषणा की थी, जिसमें से 35 लाख रुपये दिवंगत कैप्टन अंशुमान सिंह की पत्नी को दिए गए हैं और 15 लाख रुपये उनके माता-पिता को दिए गए हैं।
⚫️ शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह की पत्नी स्मृति सिंह को क्यों मिल रहे हैं कुछ लाभ?
द हिंदू में छपी रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह की पत्नी स्मृति सिंह को कुछ लाभ मिल रहे हैं, क्योंकि उन्हें वसीयत में नामित किया गया था। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कैप्टन अंशुमान सिंह के पिता सेना में सेवानिवृत्त जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) हैं और खुद पेंशनभोगी हैं। वे खुद एक पूर्व सैनिक के रूप में अन्य लाभ भी प्राप्त करते हैं।
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⚫️ क्यों भारतीय सेना पत्नी को ही मिलता है पेंशन? क्या है Nok नियम? सेना के अधिकारी ने समझाया (what is Nok)
🔴सेना के एक सूत्र ने बताया कि कानून के मुताबिक, एक बार जब कोई अधिकारी विवाहित हो जाता है, तो उसकी पत्नी पेंशन के लिए नामित होती है।
🔴कई सेवारत अधिकारियों ने घटनाओं के मोड़ और सोशल मीडिया पर स्मृति सिंह के खिलाफ इस्तेमाल की गई कठोर भाषा पर हैरान जताई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ''नामांकन पूरी तरह से अधिकारी की पसंद है। पति या पत्नी की इसमें कोई भूमिका नहीं है। वह (स्मृति सिंह) एक दुखी पत्नी हैं और उन्हें जो मिल रहा है, उसका उन्हें पूरा अधिकार है।''
🔴एक अन्य अधिकारी ने कहा, ''ऐसी समस्याएं पुरुषों के साथ आती हैं ऐसे मामले अक्सर यूनिट द्वारा सुलझा लिए जाते हैं लेकिन इस मामले में यह विशेष रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि अधिकारी के पिता स्वयं एक पूर्व सैनिक हैं। उनके पिता को अच्छे से पता होगा कि ये Nok क्या है, इसमें किसी की कोई जोर-जबरदस्ती नहीं होती। शहीद अधिकारी ने अपनी इच्छा से ही Nok अपनी पत्नी को बनाया होगा।''

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⚫️ भारतीय सेना में कैसे तय किए जाते हैं NOK? कैप्टन अंशुमान के मामले में क्या हुआ? समझें सबकुछ
🔴निकटतम परिजन (NoK) की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए अधिकारियों ने कहा कि सेना में कमीशन प्राप्त करने के बाद अधिकारी सेना समूह बीमा कोष (AGIF), भविष्य निधि (PF) और किसी भी अन्य चल या अचल संपत्ति से बीमा के लिए अपने रिश्तेदार को नामित करते हुए वसीयत तैयार करता है। इन सभी के लिए कई नामित व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन पेंशन के लिए ऐसा कोई विकल्प नहीं दिया जाता है।
🔴चूंकि कमीशन प्राप्त करने के समय अधिकारी ज्यादातर अविवाहित होते हैं, इसलिए माता-पिता को नामित किया जाता है और शादी के बाद अधिकारियों से इसे अपडेट करने के लिए कहा जाता है, जबकि एजीआईएफ, पीएफ और अन्य संपत्तियों के लिए पत्नी और माता-पिता के बीच विभाजन का प्रतिशत निर्धारित किया जा सकता है।
🔴एक अधिकारी ने कहा, "सेना उसी के अनुसार धन और पेंशन वितरित करती है। अगर अंशुमान की पत्नी (स्मृति सिंह) को लाभ मिल रहा है, तो ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्होंने (कैप्टन अंशुमान सिंह) अपनी वसीयत में उन्हें नामित किया था। उदाहरण के लिए, कैप्टन अंशुमान सिंह के मामले में, AGIF का प्रतिशत उनकी पत्नी और माता-पिता के बीच 50% था और पीएफ के लिए यह उनकी पत्नी को 100% था। पेंशन के मामले में, युद्ध में हताहत घोषित सैन्यकर्मी के रिश्तेदार को उदार पेंशन मिलती है, जो सामान्य पेंशन से अधिक होती है। जो फिलहाल उनकी पत्नी को मिल रहा है।

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⚫️ Capt. Anshuman Singh Biography: कैप्टन अंशुमान सिंह की कहानी, कैसे हुए शहीद?
कैप्टन अंशुमान सिंह भारतीय सेना में डॉक्टर थे। कैप्टन अंशुमान सिंह को मार्च 2020 में आर्मी मेडिकल कोर में कमीशन दिया गया था। वह सियाचिन ग्लेशियर पर चंदन कॉम्प्लेक्स के लिए मेडिकल अधिकारी के रूप में 26 पंजाब रेजिमेंट में शामिल हुए थे।
19 जुलाई 2023 को, चंदन ड्रॉपिंग जोन में एक बड़ी आग की घटना हुई और अधिकारी अंशुमान सिंह ने बगल के फाइबर ग्लास हट से चार से पांच व्यक्तियों को बचाया और बाद में मेडिकल सहायता बॉक्स को निकालने के लिए आग में घिरे मेडिकल जांच कक्ष में पहुंचे, जहां उनकी जान चली गई।
कैप्टन अंशुमान सिंह के वीरतापूर्ण कार्य के लिए उन्हें मरणोपरांत देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 जुलाई 2024 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में उनकी पत्नी स्मृति सिंह और मां मंजू को प्रदान किया।

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कैप्टन अंशुमान सिंह और स्मृति सिंह की शादी को केवल पांच महीने हुए थे, हालांकि वे उससे पहले आठ साल तक रिश्ते में थे। स्मृति सिंह ने रक्षा मंत्रालय द्वारा अलंकरण समारोह के समय जारी किए गए एक वीडियो में रोते हुए अपनी प्रेम कहानी बताई थी। उन्होंने बताया था कि उनका प्यार पहली नजर वाला था।
पुरस्कार समारोह के कुछ दिनों बाद कैप्टन अंशुमान सिंह के माता-पिता रवि प्रताप सिंह और मंजू सिंह ने आरोप लगाया कि उन्हें कीर्ति चक्र को छूने का भी मौका नहीं मिला और उन्होंने वित्तीय सहायता के लिए भारतीय सेना के निकटतम परिजन (NoK) मानदंडों में बदलाव की मांग की। हालांकि स्मृति सिंह ने आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने बस इतना कहना है कि जिसकी जैसी सोच है, वो वैसी ही बात करेगा। स्मृति सिंह के माता-पिता ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है।
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