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प्रियंका गांधी की एंट्री से किसे होगा ज्यादा नुकसान, SP-BSP या BJP? सामने आया बड़ा सर्वे

प्रियंका गांधी की यूपी में एंट्री से SP-BSP के महागठबंधन या फिर BJP, किसे नुकसान होगा? पढ़िए चौंकाने वाला सर्वे।

नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर पूर्वी यूपी की महासचिव के तौर पर नियुक्त हुईं प्रियंका गांधी के आने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में काफी जोश देखने को मिल रहा है। बुधवार को जब प्रियंका गांधी ने दिल्ली स्थित पार्टी दफ्तर पर पहुंचकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात की तो यूपी का सियासी पारा भी गर्म हो गया। सियासी गलियारों में चर्चा छिड़ने लगी कि क्या प्रियंका गांधी यूपी में कांग्रेस को फिर से खड़ा कर पाएंगी? सवाल यह भी बड़ा है कि क्या प्रियंका गांधी की यूपी में सक्रिय तौर पर एंट्री से सपा-बसपा के महागठबंधन या फिर भाजपा पर असर पड़ेगा और अगर पड़ेगा तो कितना? इन सवालों को लेकर एक बड़ा सर्वे सामने आया है। सर्वे के नतीजे बेहद चौंकाने वाले हैं।

सर्वे के नतीजे बेहद चौंकाने वाले

सर्वे के नतीजे बेहद चौंकाने वाले

'इंडिया टुडे पॉलिटिकल स्टॉक एक्सचेंज' के तहत 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर किए गए सर्वे के मुताबिक, सर्वे में शामिल 57 फीसदी लोगों का मानना है कि सक्रिय राजनीति में प्रियंका गांधी की एंट्री से यूपी में कांग्रेस के पुनरुद्धार में कोई मदद नहीं मिलेगी। सर्वे में सामने आया कि केवल 27 फीसदी लोग सोचते हैं कि प्रियंका गांधी के आने से यूपी में कांग्रेस का चुनावी सितारा चमकेगा। सर्वे में शामिल लोगों से जब पूछा गया कि प्रियंका के आने से यूपी में कौन सी पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान होगा तो 56 फीसदी लोगों का कहना था कि सपा-बसपा के गठबंधन पर प्रियंका की एंट्री भारी पड़ेगी। इन 56 फीसदी लोगों में वो 27 प्रतिशत लोग भी शामिल थे, जिन्होंने यह माना कि प्रियंका गांधी की एंट्री कांग्रेस को यूपी में संजीवनी प्रदान करेगी। सर्वे में 31 फीसदी लोगों का कहना है कि प्रियंका यूपी में भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगी।

राम मंदिर पर BJP के प्रति क्या है लोगों की राय

राम मंदिर पर BJP के प्रति क्या है लोगों की राय

सर्वे में शामिल लोगों ने माना कि हालांकि प्रियंका गांधी कांग्रेस का एक लोकप्रिय चेहरा हैं लेकिन उनके पास राजनीतिक अनुभव की कमी है। लोगों ने कहा कि अभी तक उन्होंने केवल अपनी मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के लिए चुनाव क्षेत्रों में ही प्रचार अभियान किया है। सर्वे में यह भी सामने आया कि 48 फीसदी लोग सोचते हैं कि यूपी में अखिलेश यादव और मायावती के महागठबंधन से भाजपा पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जबकि 35 फीसदी लोगों ने माना कि यूपी में भाजपा पर महागठबंधन भारी पड़ेगा। वहीं, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर बढ़ रहे दबाव के बीच सर्वे में पूछे गए सवालों पर 47 फीसदी लोगों का मानना है कि मोदी सरकार राम मंदिर निर्माण को लेकर गंभीर है, जबकि 35 प्रतिशत लोगों ने कहा कि मोदी सरकार राम मंदिर पर गंभीर नजर नहीं आ रही।

योगी या अखिलेश, कौन है सीएम के लिए पहली पसंद

योगी या अखिलेश, कौन है सीएम के लिए पहली पसंद

इस सर्वे में यूपी के मुख्यमंत्री के तौर पर लोकप्रिय चेहरे को लेकर भी लोगों की राय ली गई। सर्वे के नतीजे सीएम योगी को कुछ हद तक परेशान करने वाले हैं। हालांकि सीएम योगी आदित्यनाथ, यूपी के मुख्यमंत्री के तौर पर अभी भी लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं लेकिन उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई है। सितंबर में किए गए इसी सर्वे में जहां सीएम योगी 43 फीसदी लोगों की पसंद थे, वहीं वर्तमान सर्वे में उनकी लोकप्रियता का आंकड़ा गिरकर 39 फीसदी पर पहुंच गया है। सर्वे में 33 फीसदी लोगों की पसंद के साथ दूसरे स्थान पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव हैं। सितंबर में किए गए सर्व में उन्हें 29 प्रतिशत लोगों ने अपनी पसंद का मुख्यमंत्री बताया था। महज 14 प्रतिशत लोगों की पसंद के साथ बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती इस सूची में तीसरे स्थान पर हैं।

पीएम पद पर कितने लोगों की पसंद हैं राहुल गांधी

पीएम पद पर कितने लोगों की पसंद हैं राहुल गांधी

प्रधानमंत्री पद को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। सर्वे में 52 फीसदी लोगों ने प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी को अपनी पहली पसंद बताया। सितंबर में किए गए सर्वे के नतीजों में पीएम मोदी 48 फीसदी लोगों की पसंद थे। यानी उनकी लोकप्रियता में 4 फीसदी का इजाफा हुआ है। 31 फीसदी लोगों की पसंद के साथ राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के लिए दूसरे पसंदीदा उम्मीदवार हैं। सितंबर में उन्हें महज 22 प्रतिशत लोगों ने अपनी पसंद बताया था। यानी राहुल गांधी की लोकप्रियता में जबरदस्त बढ़ोत्तरी हुई है। यह सर्वे 29 जनवरी से 6 फरवरी के बीच यूपी की सभी 80 लोकसभा सीटों पर टेलीफोन के जरिए पूछे गए सवालों के आधार पर किया गया और इसमें 8442 लोगों ने हिस्सा लिया।

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