राष्ट्रपति चुनाव: अगर शिवसेना ने नहीं किया रामनाथ कोविंद का समर्थन तो क्या होगा परिणाम?

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी की घोषणा तो कर दी है लेकिन अभी भी उनके लिए कुछ सवाल रास्ते में रोड़े की तरह अटके हैं।

भाजपा के लिए सबसे बड़ा प्रश्न चिन्ह है, शिवसेना का समर्थन। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि रामनाथ कोविंद को शिवसेना समर्थन देगी अथवा नहीं।

NDA के लिए जरूरी है शिवसेना

NDA के लिए जरूरी है शिवसेना

बता दें कि इलेक्टॉरल कॉलेज में शिवसेना, NDA के लिए जरूरी है। उनके पास 25,893 मूल्य के मत है। इस हिसाब से NDA में शिवसेना बड़ी खिलाड़ी है। माना जा रहा है कि शिवसेना जल्द ही इस बारे में फैसला लेगी कि वो 17 जुलाई को संभावित चुनाव में किसका समर्थन करेगी।

इतिहास रहा है गवाह

इतिहास रहा है गवाह

वहीं कोविंद को NDA की ओर से प्रत्याशी बनाए जाने के बाद विपक्ष बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के प्रपौत्र प्रकाश आंबेडकर का नाम बतौर प्रत्याशी सामने ला सकती है। संभवतः शिवसेना ऐसे प्रत्याशी का समर्थन करेगी जो दलित भी हो और महाराष्ट्र का भी। गौरतलब है कि साल 2007 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान शिवसेना ने कांग्रेस की उम्मीदवार रहीं, प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का समर्थन किया था।

उद्धव ठाकरे ने कहा था

उद्धव ठाकरे ने कहा था

कोविंद के नाम की घोषणा होने के बाद शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरने नें कहा कि अगर यह सिर्फ दलितों का वोट पाने के लिए किया गया फैसला है तो पार्टी इसमें रुचि नहीं लेगी। हम इस मामले पर आज फैसला करेंगे। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि शिवसेना गुरुवार तक विपक्ष की ओर से घोषित किए जाने वाले प्रत्याशी का इंतजार करेगी या फिर आज ही फैसला लेगी।

संख्याबल के लिहाज से शिवसेना जरूरी

संख्याबल के लिहाज से शिवसेना जरूरी

वहीं अगर संख्याबल की बात करें तो अगर NDA को अपना राष्ट्रपति चाहिए तो उसके लिए शिवसेना का समर्थन जरूरी है। NDA पहले ही 20,000 मतों से पीछे है। भाजपा, तमिलनाडु और ओडिशा से मतों पर निर्भर है। तमिलनाडु से AIADMK और ओडिशा से BJD ने समर्थन का एलान किया है और जदयू भी लगभग समर्थन करेगी। हालांकि कि यह सब विपक्ष की ओर से घोषित किए जाने वाल राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी पर भी निर्भर करेगा।

तो कम हो जाएंगे 20,000 मत

तो कम हो जाएंगे 20,000 मत

अगर शिवसेना, भाजपा का समर्थन नहीं करेगी तो उनके पास 20,000 वोट कम हो जाएंगे। महाराष्ट्र की 288 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के 122 विधायक हैं और 12 अन्य का समर्थन है। शिवसेना के महाराष्ट्र में 63 विधायक हैं। महाराष्ट्र के एक विधायक का मत मूल्य 175 है। जिसका मतलब हुआ कि शिवसेना के समर्थन से भाजपा का कुल मत 34,475 हो जााएगा। वहीं महाराष्ट्र में कांग्रेस और उसके सहयोगियों का कुल मत 15,575 है। अगर शिवसेना ने कांग्रेस को समर्थन करने का मन बना लिया तो कांग्रेस का कुल मतमूल्य 26,000 हो जाएगा।

अगर विपक्ष के साथ गई शिवसेना

अगर विपक्ष के साथ गई शिवसेना

वहीं बात अगर महाराष्ट्र के सांसदो की करें तो यहां से 67 सांसद लोकसभा में हैं और 19 राज्यसभा में। हर सांसद का मत का मूल्य 708 है। अगर भाजपा और शिवसेना साथ रहे तो कुल 52 सांसदों का मत मूल्य होगा 36,816। यदि शिवसेना, कांग्रेस के साथ गई तो कांग्रेस के 10,620 मत मिला कर 25,488 मत हो जाएंगे।

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