कलकत्ता हाईकोर्ट ने 'दहेज कानून' को लेकर कही बड़ी बात, कहा- कुछ महिलाओं ने कानूनी आतंकवाद फैलाया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए के दुरुपयोग को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने दहेज कानून के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई है।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार (21 अगस्त) को कहा कि कुछ महिलाओं ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए का दुरुपयोग करके "कानूनी आतंकवाद" फैलाया है।

Calcutta high court says women are engaging in “legal terrorism” by misusing Dowry Law

आपको बता दें कि, यह धारा महिलाओं को उनके पति या उनके परिवार के सदस्यों द्वारा क्रूरता से बचाने के इरादे से लागू किया गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट की यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान आई। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच एक व्यक्ति और उसके परिवार द्वारा उसकी अलग हो चुकी पत्नी द्वारा उनके खिलाफ दायर आपराधिक मामलों को चुनौती देने वाले अनुरोधों पर सुनवाई कर रहा था।

सिंगल बेंच के जज न्यायमूर्ति सुभेंदु सामंत ने कहा, "समाज से दहेज की बुराई को खत्म करने के लिए धारा 498ए का प्रावधान लागू किया गया है। लेकिन कई मामलों में देखा गया है कि उक्त प्रावधान का दुरुपयोग कर नये कानूनी आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि, आईपीसी की धारा 498ए के तहत सुरक्षा की परिभाषा में जिस उत्पीड़न और यातना का जिक्र है उसे केवल शिकायतकर्ता से साबित नहीं किया जा सकता... परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मुझे लगता है कि कार्यवाही रद्द करने के लिए इस अदालत के अधिकार का उपयोग करना आवश्यक है अन्यथा आपराधिक कार्यवाही जारी रखना अदालत की प्रक्रिया के दुरुपयोग के समान होगा।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि महिला के पास अपनी शिकायत के समर्थन में कोई मेडिकल रिकॉर्ड या दस्तावेजी सबूत नहीं थे। "कानून एक शिकायतकर्ता को आपराधिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति देता है, लेकिन इसे ठोस सबूतों के आधार पर उचित ठहराया जाना चाहिए। जस्टिस शुभेंदु सामंत की एकल पीठ ने महिला की शिकायत के आधार पर निचली अदालत की ओर से शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

अदालत ने कहा कि, वास्तव में शिकायतकर्ता द्वारा पति के खिलाफ लगाया गया सीधा आरोप केवल उसका वर्जन है। यह किसी दस्तावेजी या चिकित्सीय साक्ष्य का समर्थन नहीं करता। एक पड़ोसी ने पत्नी और उसके पति के झगड़े के बारे में सुना; दो व्यक्तियों के झगड़े का यह मतलब या साबित नहीं है कि कौन आक्रामक है या कौन पीड़ित है।

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