पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद हिंसा पर कोर्ट का आदेश, सभी पीड़ितों के केस दर्ज करे पुलिस, मुहैया कराएं राशन
कोलकाता, 02 जुलाई। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में राजनीतिक हिंसा देखने को मिली थी। भाजपा और टीएमसी के कार्यकर्ताओं के बीच कई जगहों पर हिंसा हुई। इस हिंसा में काफी लोगों की जान चली गई थी। हिंसा के बाद लोगों ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी की सरकार पीड़ितों की शिकायत नहीं सुन रही है और ना ही उनकी कोई मदद कर रही है। जिसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले में आदेश पारित करके पुलिस को निर्देश दिया है कि वह सभी हिंसा पीड़ितों के केस दर्ज करे। इसके साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह सभी पीड़ितों का इलाज कराए और उन लोग पीड़ितों को भी राशन मुहैया कराए जिनके पास राशन कार्ड नही है।

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दरअसल बंगाल चुनाव के बाद भाजपा और टीएमसी के कार्यकर्ताओं के बीच कई जगह पर हिंसक झड़प हुई थी, जिसमे कई लोगों की जान चली गई थी। लेकिन ममता सरकार लगातार इस तरह की हिंसा से इनकार कर रही थी, ऐसे में कोर्ट का फैसला ममता सरकार के लिए बड़ा झटका है। कोर्ट ने भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की दूसरी ऑटोप्सी को कमांड अस्पताल से कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जादवपुर के डीएम, एसपी और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि आखिर क्यों आप लोगों के खिलाफ अवमानना के तहत कार्रवाई नहीं की जाए।
कोर्ट ने चुनाव बाद हुई हिंसा से संबंधित सभी कागजों व दस्तावेज को संभालकर रखने का मुख्य सचिव को निर्देश दिया है। बता दें कि बंगाल चुनाव के बाद हिंसा की मानवाधिकार आयोग भी जांच कररहा है। इस जांच को अब 13 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया है, जिसपर सुनवाई 13 जुलाई को होगी।












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