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फिर से खुले 'बुराड़ी के घर' के दरवाजे, 3 दिन रहने के बाद परिजनों ने बताया 'अंदर का सच'

नई दिल्ली। दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत वाले घर के दरवाजों को साढ़े चार महीने बाद फिर से खोला गया है। 'मोक्ष की साधना' करते हुए इसी साल जून के महीने में भाटिया परिवार के 11 लोगों ने आत्महत्या कर ली थी। एक जुलाई को 11 लोगों की मौत के बाद बुराड़ी इलाके के संत नगर की गली संख्या-2 के मकान नंबर- 137 को दिल्ली पुलिस ने सील कर दिया था, ऐसा जांच के लिए किया गया था। जांच के बाद अब इस मकान की तीन महीने के बाद सील दोबारा खुली गई है। कोर्ट ने इस घर का हक नारायणा देवी के बडे बेटे दिनेश भाटिया को दिया है।

घर में तीन दिन रुका दिनेश का परिवार

घर में तीन दिन रुका दिनेश का परिवार

गुरुवार को दिनेश अपनी पत्नी कमलेश हाडा , बहन सुजाता नागपाल और अपने नौकर से साथ उस घर में पहुंचे। उन्होंने इस घर की साफ-सफाई करायी और इस घर में उस घटना के बाद पहली रात गुजारी। दिनेश ने बताया कि, ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही थी कि घर में आत्माएं रहती हैं। लोगों इसे भूताह घर मान रहे हैं। इन सब झूठी अफवाहों को रोकने के लिए वह इस घर में तीन रात गुजारी हैं। हमें इस तरह की घर में कई एक्टिविटी नहीं दिखी। साफ-सफाई करने के बाद घर में नवरात्रि की पूजा की गई।

11 पाइपों को ललित के बड़े भाई दिनेश ने बुधवार को ही तुड़वा दिया

11 पाइपों को ललित के बड़े भाई दिनेश ने बुधवार को ही तुड़वा दिया

मकान की सील खोने के बाद यहां पर लगाई गईं 11 पाइपों को ललित के बड़े भाई दिनेश ने बुधवार को ही तुड़वा दिया। दिनेश के करीबियों का कहना है कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि 11 मौतों को लोग इन 11 पाइपों से भी जोड़कर देख रहे थे, खासकर मीडिया। बृहस्पतिवार को घर और दुकान का ताला खोला गया। इस दौरान वहां का माहौल गमगीन ही था। सुबह नौकर राम विलास ने ललित के प्लाईबोर्ड की दुकान ताला खोला और साफ सफाई की।

 घर को मंदिर में बदलने की योजना

घर को मंदिर में बदलने की योजना

दिनेश ने कहा कि, अफवाहों के चलते हम परेशान हैं, हम घर को मंदिर में बदलने की योजना बना रहे थे क्योंकि कोई भी इस संपत्ति को खरीदना नहीं चाहता। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में रहने वाले दिनेश ने कहा, हम इन अफवाहों को रोकना चाहते थे और इसके लिए हम लोगों ने घर को खुलवाया और उसमें रुके। उन्होंने यह भी कहा कि उनके प्रवास के दौरान उन्हें किसी भी 'डर या परेशानी' का सामना नहीं करना पड़ा, बल्कि इसके बजाय 'अत्यधिक शांति' महसूस हुई। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि घर में मृत परिवार के सदस्यों की फोटो, कपड़े और अन्य सामान देखकर भावुक जरूर हो गए।

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